वृद्धजनों की मन: स्थिति का साकार दर्पण है 'संध्या छायाÓ

Jan 09 2022

ग्वालियर। शहर में नए साल 2022 में हुआ पहला नाटक देखा नाम 'संध्या छायाÓ। नाटक जयवंत दलवी का लिखा हुआ था और निर्देशन रवीन्द्र आंनद राव जगताप का रहा।
नाटक में पति-पत्नी बूढ़े हो गए हैं। संतान विदेश में जा बसी है जो घर एक समय किलकारियों और हंसी-ठट्टे में गूंजता था, वहां सन्नाटा छा गया है। उनके जीवन की सभी रुचियां शिथिल हो गई हैं। खाने-पीने के शौक भी समाप्त हो गए हैं। दोनों के पास अब बातचीत को कोई विषय नहीं रह गया है। बूढ़े पति-पत्नी का पेंशन से निर्वाह होता है। विदेश में जा बसे बेटे का कभी-कभी पत्र या फोन आ जाता है लेकिन अपने देश अपने घर आने में कोई रुचि नहीं। अर्थ यह है कि बूढ़े मां-बाप को उनसे कुछ विशेष आशा नहीं। आज के युग में यह कहानी किसी एक परिवार के वृद्धजनों की नहीं है। वे मानसिक असुरक्षा और अकेलेपन से बुरी तरह पीडि़त है। संध्या छाया की गिरत में आए बूढ़े मां-बाप की चिंताए, मन:स्थितियां और समस्याएं ही हैं नाटक का कथानक और अभिनय।
मराठी नाटक 'संध्या छायाÓ मूलत: जयवंत दलवी का लिखा हुआ है जिसका हिन्दी अनुवाद डॉ कुसुम कुमार का है। रंग सारथी नाट्य संस्था और एसोसिएशन ऑफ ग्वालियर यूथ सोसाइटी की संयुक्त प्रस्तुति संध्या छाया ने दर्शकों के मानस को झकझोरा तो इसके पीछे कथानक, कलाकारों का बढिय़ा अभिनय और कसावट भरा निर्देशन रहा। नाटक में अप्पा के रोल में गोपाल देशपांडे सटीक बैठे। नानी का किरदार रेणुका झंवर ने निभाया। दोनों मुख्य पात्र नाटक की विषय वस्तु को साकार करने में सफल रहे। यह जोड़ी इस तरह के रोल में फिट बैठी जिसमें भाव सप्रेषण, चाल-ढाल और संवाद अदायगी से चरित्र को उभारने की कला दर्शकों को प्रभावित करती है।
अन्य पात्र विनय बने अनिकेत गुप्ता, मौसमी के रोल में रेशू गंगवार, दादा बादल बोस, श्याम आशुतोष पांडे, दीनू अनिकेत दुबे और बहू बनकर दीवा चौहान ने छोटे छोटे किरदार निभाकर नाटक को मुकाम तक पहुंचाया। हादु की भूमिका को बिना संवाद बोले विजय जुन्नरकर ने बहुत बढिय़ा निकाला और दर्शकों का दिल जीत लिया।
मंच सज्जा में प्रमोद पत्की, नारायण पिरोनिया और पूरी टीम का काम नाटक की उल्लेखनीय बात रही। टेलीफोन वाले दृश्यों में सटीक स्पाट लाइट को छोड़कर प्रकाश संयोजन ठीक रहा। शैलेन्द्र शर्मा और संजय अरोरा ने यह प्रकाश व्यवस्था संभाली। दृश्यों को उभारने में पाश्र्व संगीत ने महती भूमिका निभाई जिसका संचालन शुभम कोटिया और सोम साहू ने बख़ूबी किया।