श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण ही मानव जीवन के उद्धार की सीढ़ी-घनश्याम शास्त्री

Jan 05 2022

ग्वालियर। श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण ही मानव जीवन के उद्धार की सीढ़ी है, शर्त सिर्फ इतनी है कि श्रोता की श्रद्घा कितनी गहरी है, क्योंकि उसी गहराई के अनुसार ही भक्ति का फल मिलता है। यह बात सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पंडित घनश्याम शास्त्री ने कही आगे आचार्य ने श्रोताओं को काम क्रोध, मद, मोह लोग से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा हृदय से किया गया प्रभु स्मरण मनुष्य के मोक्ष के द्वार खोलने का काम करता है। इसलिए अपने मन को काबू में रखते हुए अपने हृदय को प्रभु चरणों में स्मृत रखिए। भागवत कथा के तीसरे दिन उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता का महत्व समझाते हुए कहा, भगवत गीता में मनुष्य के जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण सार समाहित है भागवत पुराण को सुनने और उसका अनुसरण करने से मनुष्य का जीवन धन्य हो जाता है। उन्होंने कहा, अगर आप बीमार हैं तो बिना दवा के ठीक नहीं होंगे, ठीक इसी प्रकार जब तक शास्त्र संगत अच्छा सत्संग नहीं करेंगे, तब तक मन का इलाज नहीं होगा। श्री परीक्षित ने पूछा कि प्रभु शरीर के रोग तो होते हैं जिनको मैं जानता हूं, लेकिन क्या मन के रोग भी होते हैं। तब सुखदेव ने परीक्षित को बताया, मनुष्य को मन के रोग जीवन भर तमाम भ्रांतियों में रखते हैं ऐसे में मन को काबू में रखना स्वयं के स्वास्थ्य को ठीक करने के बराबर है। इस अवसर पर बालाजी दरबार के महंत नरेंद्र मिश्रा एवं कथा परीक्षित विष्णु सरिता मिश्रा ने भागवत की आरती उतारी। इस अवसर पूर्व मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, सत्ता सुधार अखबार के संपादक श्याम श्रीवास्तव,त्रप्ति भटनागर, रवि तोमर पार्षद मौजूद रहे।