तानसेन समारोह में सुबह की सभा में रमाकांत गायकवाड़ ने ख्याल गायन की प्रस्तुती से समां बांधा
Dec 29 2021
ग्वालियर। संगीत सम्राट तानसेन की याद में आयोजित हो रहे तानसेन समारोह में बुधवार सुबह की सभा में रमाकांत गायकवाड़ ने ख्याल गायन की प्रस्तुती से समां बांधा। उनकी प्रस्तुती सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। सर्द मौसम होने के बाद भी तानसेन समारोह पर श्रोताओं की संख्या अच्छी खासी थी।
तानसेन समारोह की बुधवार की प्रात: कालीन सभा में मुंबई से आए रमाकांत ने अपने गायन का आगाज राग तोड़ी से किया। विलंबित एक ताल में बड़ा ख्याल के बोल थे, अब मोरे राम। इसके बाद दो छोटे ख्यालों का गायन किया। तीन ताल मध्यलय में निबद्ध प्रसिद्ध बंदिश गरबा में का संग लागी और द्रुत लय में निबद्ध अब मोरी नैया पार करो रे की प्रस्तुती दी। दोनों ही बंदिशों को गाने में शामिल कर जो कमाल दिखाया, वो काबिले तारीफ रहा। उनके सुर लगाने का ढंग ही निराला था। किराना और पटियाला घराने की सभी विशेषताएं अपने गायन में समेटे हुए उन्होंने जब राग का विस्तार किया तो सुरों के फूल खिलते चले गए। इसके बाद विविधता पूर्ण तानों ने रसिकों को रस विभोर कर दिया। रमाकांत गायकवाड़ ने लयकारी का जो कमाल दिखाया वो हतप्रभ करने वाला था। उन्होंने अपने गायन का समापन प्रसिद्ध ठुमरी मोरे नैन लगेगी बरसात, बलम मोहि छोड़ न जाना के सुमधुर गायन के साथ किया। मीठे-मीठे सुरों में पगी यह प्रस्तुती रसिकों को मुग्ध कर गई। उनके साथ तबले पर अनिल मोघे और हारमोनियम पर महेश दत्त पांडेय ने कुशल संगत की।
ध्रुपद केंद्र की प्रस्तुती से हुई प्रात:कालीन सभा की शुरुआत
तानसेन समारोह में बुधवार की प्रात:कालीन सभा की शुरुआत पारंपरिक ढंग से ध्रुपद केंद्र ग्वालियर के आचार्यों और विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत ध्रुपद गायन से हुई। ध्रुपद गुरू अभिजीत सुखदाणे के मार्गदर्शन में राग "अहीर भैरव" में अलापचारी के बाद धमार पेश किया। ध्रुपद रचना के बोल थे चलो सखी बृजराज। इसके बाद जलत सूल ताल में बंदिश दुर्गे भवानी की मनोहारी प्रस्तुती दी। इस प्रस्तुती में यखलेश बघेल और अनुज प्रताप शामिल थे। पखावज पर अनुज प्रताप ने संगत की।
पिता-पुत्र की जोड़ी ने युगल ध्रुपद गायन से दी गान मनीषी तानसेन को स्वरांजलि
तानसेन समारोह की छठी एवं बुधवार की प्रात:कालीन सभा में पिता-पुत्र की जोड़ी ने उच्चकोटि की ध्रुपद गायिकी पेश कर गान मनीषी तानसेन को सच्ची स्वरांजलि अर्पित की। कानपुर उत्तरप्रदेश से पधारे पंडित विनोद कुमार द्विवेदी एवं उनके सुयोग्य सुपुत्र आयुष कुमार द्विवेदी के युगल ध्रुपद गायन ने गुणीय संगीत रसिकों पर गहरी छाप छोड़ी।युगल गायन की शुरुआत राग "भीम पलाशी" से की। उन्होंने ध्रुपद शैली की बहुत ही कठिन 18 मात्रा की रचना मत्त ताल में प्रस्तुत कर समा बांध दिया। मधुर एवं बुलंद आवाज की धनी पिता-पुत्र की जोड़ी ने जब ध्रुपद बंदिश "राम नाम धरो ध्यान निश दिन" का गायन किया तो रसिक भगवान राम की भक्ति में ओत-प्रोत हो गए। राग भीम पलाशी में ही उन्होंने शूल ताल में एक बंदिश "मूरत बसी मन में" का भी सुंदर रागदारी के साथ गायन किया। उन्होंने संगीत सम्राट तानसेन को समर्पित ध्रुपद रचना "धन धन तानसेन" प्रस्तुत कर अपने गायन को विराम दिया। इस प्रस्तुति में पखावज पर मनोज सोलंकी और सारंगी पर उस्ताद आबिद हुसैन ने अच्छा साथ दिया।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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