तानसेन समारोह-रिमझिम बारिश की संगीतमयी थाप पर दिव्य सुरों से सजी गान
Dec 28 2021
ग्वालियर। हल्की रिमझिम बारिश की संगीतमयी थाप के साथ व्रह्म नाद के साधकों ने जब स्वर लहरियां बिखेरी तो लगा जैसे गान मनीषी तानसेन का आंगन दिव्य सुरों में सज गया है। फ्रांस से आए संगीतज्ञ मार्टिन डबॉइस ने भारतीय शास्त्रीय संगीत के रागों के साथ संगत की तो लगा सारे रुके सुर एक साथ बजने लगे हों। यहां बात हो रही है विश्व संगीत समागम तानसेन समारोह के तहत रिमझिम फुहारों के बीच सजी मंगलवार की प्रात:कालीन महफिल की।
मंगलवार सुबह जैसे-जैसे बारिश का बरसना शुरू हुआ तो मीठे-मीठे सुरों ने भी बूंदों के साथ साम्य बना लिया। पश्चिमी देश फ्रांस से आये मार्टिन ने ताल वाद्य के अलावा कोरा व गायन भी किया। उनके द्वारा प्रस्तुत जैज संगीत सुनते ही बन रहा था। मार्टिन के गायन-वादन में भारतीय शास्त्रीय संगीत की झलक भी दिखाई दी। अफ्रीकन लोक संगीत से भी उन्होंने श्रोताओं को रू-ब-रू कराया। उनकी आकर्षक प्रस्तुति से एक नूतन संगीत गूंज उठा और रसिक मंत्रमुग्ध हो गए।
भारतीय संगीत महाविद्यालय के ध्रुपद गायन से हुई शुरुआत
तानसेन समारोह की चौथी एवं मंगलवार की प्रात:कालीन सभा की शुरुआत पारंपरिक ढंग से स्थानीय भारतीय संगीत महाविद्यालय के ध्रुपद गायन के साथ हुई। राग देशी में प्रस्तुत ध्रुपद रचना के बोल थे "रघुवर की छवि सुंदर"। पखावज पर संजय आगले और हारमोनियम पर मुनेन्द्र सिंह ने संगत की। इस मनोहारी प्रस्तुति में संगीताचार्य संजय देवले का कुशल संयोजन रहा।
रिमझिम में रसिकों ने उठाया संगीत का लुफ्त
ग्वालियर को यूं ही तानसेन की नगरी नहीं कहा जाता है। मंगलवार सुबह जब रिमझिम हो रही थी तो लगा कि सुबह की सभा में लोग नहीं पहुंचेंगे, लेकिन रसिक के मन का क्या करें। भीगते और कड़ कड़ाके की ठंड में रसिकों ने संगीत का भरपूर लुफ्त उठाया है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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