पं. कार्तिक कुमार और पं. विक्कू को राष्ट्र्रीय कालिदास सम्मान, सम्मान राशि बढ़कर 5 लाख रुपए

Dec 27 2021

ग्वालियर। 97वें तानसेन संगीत समारोह का शुभारंभ प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में वर्तमान काल को केवल विकास के लिए ही नहीं कला एवं संगीत के स्वर्णिमकाल के रूप में भी स्थापित करेंगे।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय तानसेन अलंकरण और कालिदास सम्मान की राशि बढ़ाकर 5-5 लाख रुपए करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में शताब्दी तानसेन समारोह को धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। शुभारंभ कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, संस्कृति मंत्री ऊषा ठाकुर उपस्थित रहीं।
भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में देश और दुनिया के सर्वाधिक प्रतिष्ठित महोत्सव विश्व संगीत समागम तानसेन समारोह का संगीतधानी ग्वालियर में मुख्यमंत्री चौहान के मुख्य आतिथ्य में भव्य व रंगारंग शुभारंभ हुआ। यहां हजीरा स्थित संगीत सम्राट तानसेन की समाधि के समीप मंच को आकर्षक सिद्धेश्वर मंदिर ओंकारेश्वर की थीम पर बनाया गया। समारोह के शुभारंभ प्रतिष्ठित सितार वादक पं. कार्तिक कुमार मुंबई और विख्यात घट्म वादक पद्मभूषण पं. विक्कू विनायकरम चेन्नई को क्रमश: वर्ष 2013 व 2014 के राष्ट्रीय कालिदास सम्मान से अलंकृत किया गया।
समारोह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर व केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं संस्कृति व पर्यटन मंत्री ऊषा ठाकुर सहित अन्य अतिथियों ने दोनों मूर्धन्य संगीत साधकों को राष्ट्रीय कालिदास सम्मान के रूप में 2 लाख रूपए की आयकर मुक्त सम्मान राशि, प्रशस्ति पट्टिका व शॉल-श्रीफल भेंट किए।
इस अवसर पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री भारत सिंह कुशवाह, सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, विधायक डॉ. सतीश सिकरवार व भाजपा जिला अध्यक्ष कमल माखीजानी सहित अन्य अतिथिगण मंच पर बैठे थे।
बैजू बावरा समारोह भी होगा
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस अवसर पर घोषणा की कि प्रतिष्ठित तानसेन समारोह की तर्ज पर संगीत सम्राट तानसेन के समकालीन महान संगीत मनीषी बैजू बाबरा की स्मृति में "बैजू बावरा समारोह" का आयोजन भी शुरू किया जाएगा। उन्होंने संस्कृति मंत्री ऊषा ठाकुर और प्रमुख सचिव संस्कृति शिव शेखर शुक्ला से इस समारोह की तिथि व स्थान समेत इसकी रूपरेखा तैयार करने के लिए कहा।
कला एवं संस्कृति को पूरा आश्रय मिल रहा है
केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि जीवन की बाकी सब चीजें परिश्रम से फलीभूत हो सकती हैं, लेकिन कला एवं साहित्य के लिए राजाश्रय जरूरी है। ग्वालियर में पुरातन काल से लेकर और राजा मानसिंह एवं महादजी सिंधिया के समय में कला व संगीत को पूरा आश्रय मिला। आजादी के बाद प्रदेश सरकार ने भी इसे पूरी शिद्दत के साथ आगे बढ़ाया।
वीर सपूतों एवं संगीत कला मर्मज्ञों की भी धरा है ग्वालियर
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि ग्वालियर की धरा वीर व सपूतों की ही नहीं संगीत एवं कला प्रेमियों की धरा है। ग्वालियर में युग-युग से इसका संरक्षण होता रहा है। ग्वालियर की माटी व पानी का परिणाम है कि यहां एक से बढ़कर एक संगीतज्ञ जन्मे और भारत ही नहीं पूरी दुनिया को मूर्धन्य संगीत साधकों की माला प्रदान की। उन्होंने कहा कि सिंधिया शासनकाल में भी संगीत कला को विशेष आश्रय मिलता रहा। सिंधिया राज्यकाल में ही सन् 1924 में तानसेन समारोह का शुभारंभ हुआ।