मनुष्य को अहंकार से दूर रहकर भगवान का स्मरण करना चाहिए-कृष्ण विहारी

Dec 18 2021

ग्वालियर। प्रभु तक पहुंचने के लिए गुरु की शिक्षा व सत्संग सुगम सीढ़ी है। अहंकार को खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए। मनुष्य के विनाश का मूल कारण अहंकार ही होता है। सहजता और सौम्यता बड़प्पन के गुण हैं। मनुष्य को अहंकार से दूर रहकर भगवान का स्मरण करना चाहिए तभी भगवान की प्राप्ति संभव है। यह विचार कथा वाचक कृष्ण विहारी दास महाराज ने परीक्षित अशोक रंजनी गुप्ता परिवार की ओर से मुरार स्थित श्रीमदन मोहन मंदिर प्रांगण में शनिवार तीसरे दिन ध्रुव चरित्रा व नरसिंह अवतरण श्रीमद भागवत कथा में संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
महाराज ने नरसिंह अवतार का प्रसंग सुनते हुए कहा कि पूर्व काल में दैत्य राज पुत्र महाबली हिरण्यकश्यप ने ब्रह्माजी के वर से गर्व युक्त होकर संपूर्ण त्रिलोकी को अपने वश में कर लिया। भक्त प्रहलाद एक दिन अपने गुरु के साथ पिता के पास गए। उस समय पिता मद्यपान कर रहे थे। तब अपने चरणों में झुके हुए अपने पुत्र प्रहलाद को गोद में उठाया। प्रहलाद ने अपने पिता से हरि का नाम लेने को कहा तो दैत्य राज ने उसे गोद से उठाकर दूर फेंक दिया। उसे मारने के अनेक प्रयास किए। एक दिन भक्त प्रहलाद अपने सह पाठियों के साथ हरि का नाम ले रहा था। उसकी आवाज दैत्यराज के कानों में पहुंची तब दैत्यराज ने आकर कहा कि तेरा हरि कहां है तो प्रहलाद ने कहा कि मेरा हरि तो कण-कण में विद्यमान है। दैत्यराज ने कहा कि इस पत्थर नुमा खंभे में हरि कहां हैं, तभी भगवान प्रहलाद की लाज रखने के लिए उस खंभे में से निकल कर भगवान ने नृसिंह अवतार लिया ओर दैत्यराज का वध कर दिया। इस अवसर पर विभिन्न प्रकार की झांकियों सहित संगीतमय भजनों पर श्रध्दालुओं ने नृत्य किया। कथा के उपरांत श्रीमद भागवत की आरती अशोक गुप्ता, रंजनी गुप्ता, कैलाशचंद्र गुप्ता, उमाशंकर गुप्ता, मुकेश गुप्ता, अंनत गुप्ता व मयंक गुप्ता सहित श्रध्दालुओं ने उतारी। 
कथा में 19 रविवार को मुरार स्थित मदनमोहन मंदिर प्रांगण में दोपहर 3 बजे से में श्रीराम जन्म, कृष्ण जन्मोत्सव एवं नंदोत्सव धूमधाम के साथ मनाया जाएगा।