निजीकरण का विरोध, राष्ट्रीयकृत बैंकों की हड़ताल शुरू, बाड़े पर किया प्रदर्शन बैंकों के बाहर लटके रहे ताले, एटीएम पर भीड

Dec 16 2021

ग्वालियर। निजीकरण सहित अन्य मांगों को लेकर देशभर के साथ शहर में स्थित राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारियेां ने गुरुवार से दो दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों से नाराज 14 से अधिक राष्ट्रीयकृत बैंकों के हजारों कर्मचारी व अधिकारियों ने गुरुवार की सुबह से ही कामकाज बंद कर दिया और सभी र्काचारी व अधिकारी सुबह 11 बजे महाराज बाड़ा स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा पर एकत्रित हुए कर्मचारियों ने अपनी मांगों को पूरा करने के लिए बैंक की शाखा के बाहर जमकर प्रदर्शन किया, कर्मचारियों ने सरकार की कर्मचारी विरोधी निजीकरण नीति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इस बारे में जानकारी देते हुए यूनियन के पदाधिकारी व सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अजय शर्मा ने बताया कि बैंक कर्मी द्वारा लागतार मांग की जा रही हैं कि निजीकरण को रोका जाए, लेकिन इसके बाद भी लागातार बैंकों का निजीकरण किया जा रहा है। 
हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि अभी केवल दो दिन की हड़ताल की जा रही हैं अगर निजीकरण नहीं रोका गया तो अनिश्चित कालीन हड़ताल की जाएगी। दो दिवसीय यह हड़ताल का अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ एआईबीओसीए, अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ एआईबीईए और बैंक कर्मचारियों के राष्ट्रीय संगठन एआईबीईएद्ध, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस सहित नौ यूनियनों के संगठनों ने हड़ताल काआह्वान किया था जिस पर यह स्ट्राइक श्ुारू हुई है।
निजीकरण के विरोध में आयोजित प्रदर्शन का संबोधित करते हुए यूनाइटेड फोर ऑफबैंक यूनियन के संयोजक वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि निजीकरण के उपरान्त किसानों छोटे व्यापारियों आम आदिगियों को ऋण नहीं मिल पायेगा और विकास का चक चम विरोध के बाद राष्ट्रीयकरण किया था।
करोड़ों का कारोबार होगा प्रभावित
राष्ट्रीयकृत बैंक के कर्मचारियों की इस हड़ताल का असर भी नजर आया बैंकों में लेन-देन करने पहुंचे कर्मचारी सुबह बैंक पहुंचे तो उन्हें बैंकों पर ताले लटके हुए मिले जिसकी वजह से उन्हें बिना काम की वापस लौटना पड़ा। वहीं दूसरी ओर दो दिनों की इस हड़ताल से करीब 500 करोड़ रुपए का लेन-देन भी प्रभावित होने वाला है। इसके साथ ही बैंक बंद होने के कारण लोगों ने रकम निकासी के लिए एटीएम का सहारा लेना पड़ा और एटीएम पर सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक लोगों की भीड़ नजर आई।