जेयू के नए कुलपति प्रो. तिवारी ने संभाला पदभार- यूनिवर्सिटी को नई बुलंदियों पर ले जाना है-अविनाश तिवारी

Dec 10 2021

ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय के नए कुलपति प्रो अविनाश तिवारी ने शुक्रवार को यूनिवर्सिटी पहुंचकर पदभार गृहण किया। इस मौके पर कागजी खानापूर्ति के बाद निवृत्तमान कुलपति प्रो संगीता शुक्ला ने उनको गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया और शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के सभी अधिकारी उपस्थित थे। नवनियुक्त कुलपति ने इस दौरान सभी से कहा कि हम सभी को साथ मिलकर कार्य करना है और यूनिवर्सिटी को नई बुलंदियों पर ले जाना है।
गौरतलब है कि आठ साल के लंबे अंतराल के बाद जीवाजी विश्वविद्यालिय(जेयू) को नया कुलपति मिला है। नए कुलपति प्रो. अविनाश तिवारी के सामने जेयू में फैली अनियमितताएं व कार्य परिषद सदस्यों की शिकायतों का निराकरण करना बड़ी चुनौतियां रहेंगी। पदभार गृहण करने के बाद पत्रकारों से चर्चा में नवनियुक्त कुलपति प्रो तिवारी ने कहा कि सभी को साथ लेकर चलना है, बैठक में सदस्यों से चर्चा करेंगे। जो मुद्दे हैं उन पर सर्वसम्मति से फैसले लिए जाएंगे। सभी को मिलकर विद्यार्थियों के हित में काम करना है, ताकि विश्वविद्यालय की तरक्की हो सके।
कुलपति के सामने ये चुनौतियां
जेयू में आठ साल बाद कुलपति बदला है। पिछले चार साल में यहां कई अनियमितताएं सामने आई। कार्य परिषद के सदस्य खुलकर इनका विरोध कर रहे हैं। लोकायुक्त में शिकायतें की और हाई कोर्ट में भी याचिकाएं दायर की गई। पूर्व कुलपति ने कार्य परिषद के अधिकारों पर अतिक्रमण कर लिया था। नए कुलपति को लेकर कार्य परिषद सदस्यों ने भी तैयारी कर ली है कि पहले जो अधिकारों पर अतिक्रमण हुआ है, उनको मुक्त कराया जाएगा। कुलपति को एक निर्धारित भुगतान तक के अधिकार हैं, लेकिन पूर्व कुलपति ने लाखों रुपये के भुगतान किए। इस पर कार्य परिषद सदस्यों का विरोध है। कार्य परिषद की बैठकों काफी हंगामे भी हुए हैं। स्वीमिंग पूल में करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन वह अभी अधूरा है। इसकी लोकायुुक्त में जांच चल रही है। विद्यार्थियों की समस्या की सुनवाई नहीं होती थी, जिसके चलते आंदलनों की संख्या बढ़ी थी। इससे विवि की छवि में भी गिरावट आई है। रिजल्ट देर से घोषित हो रहे हैं। इसका खामियाजा विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा है। सेवानिवृत्त प्रोफेसरों को फिर से नियुक्तियां गलत देने का मामला है। जेयू की ग्रेडिंग के लिए नैक का निरीक्षण होना है। ऐसी स्थिति में ग्रेडिंग बचाने की बड़ी चुनौती सामने है। वर्तमान में शिक्षकों की भारी कमी है। शिक्षकों की कमी के कारण नैक की ग्रेडिंग न छिन जाए। ए प्लस का दर्जा बचाने के लिए इस ओर भी ध्यान देना होगा। अध्ययन शालाएं अतिथि विद्वानों के भरोसे संचालित हो रही हैं। ऐसे में नियमित प्रोफेसर हैं, वे कक्षाओं में पढऩा शुरू कर सकें, यह भी व्यवस्था बनाना चुनौती रहेगी। विश्वविद्यालय में संचालित कार्सो में विद्यार्थियों की संख्या घटी है। विद्यार्थी फिर से विश्वविद्यालय की ओर आकर्षित हो, उसको लेकर कार्य करने होंगे।