उर्स मैले में सजी वाजा खानून साहब की गद्दी

Dec 08 2021

ग्वालियर। गरीब नवाज हजरत ख़्वाजा खानून के 503 वें उर्स मैले में गद्दी की खास मेहफिल हुई। रूहानी नजरिये से यह उर्स का सबसे महत्व पूर्ण दिन माना जाता है। इस रोज दरगाह के समाखाने में वाजा साहब की 500 वर्ष पुरानी परपरा गत गद्दी सजाई जाती है मान्यता है कि इस रोज जो सच्चे मन से हाजिरी लगाते हैं उनकी मुरादैं जरूर पूरी होती हैं। उर्स संयोजक राम बाबू कटारे ने बताया कि कोरोना गाइड लाइन के कारण रात में होने बाली मजलिस दोपहर दो बजे शुरू हुई। सज्जादा नशीन हजरत ख़्वाजा राशिद खानूनी डॉ ऐजाज खानूनी साकिब खानूनी और मुरीदगान के साथ समा रोशन कर समाखाने में सजी गद्दी पर बिराजे जहाँ कबाली की मजलिस हुई। दरगाह के दस्तारबन्द कबाल सलीम झंकार और फरीद खानूनी के साथ अन्य कबाल पार्टियों ने परपरा गत कौल पेश किया। इसके बाद नबर से मौहमद अशफाक, अतर वारिसी, रफीक धौलपुरी मकबूल साबरी मौ फरीद, बाबू भौलू , इशाक कादरी, उमर दराज, मौ शानदार, यूसुफ नियाजी स़लमान अजमेरी फरीद खानूनी और अंत में सलीम झंकार ने सूफियाना कबालियाँ पेश कीं। सज्जादा नशीन हजरत ख़्वाजा राशिद खानूनी ने दुआ के साथ बिशेष चादर पेश की। इस मौके पर शहर काजी जनाब अदुल अजीज कादरी, हाजी जमाल सा, सज्जादा नशीन शेख बन्दगी सा, शहजाद हसन के अलावा अनेक आस्तानों के जाँनशी और अकीदतमन्द भारी संख्या में मौजूद रहे। समापन पर परम्परा गत बेसनी रोटी और खिचड़ी का तबर्रूक बितरित किया गया।