सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस माहेश्वरी का किया अभिनंदन

Dec 05 2021

ग्वालियर। विधि व्यवसाय को अपनाने वाले अधिवक्ताओं को अपने सीनियर से विनम्र होकर सीखने की ललक के साथ काम करना चाहिए। उन्हें असफल होने पर चिंता नहीं करनी चाहिए। यह बात सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जस्टिस माहेश्वरी ने कही। वह गालव सभागार में अपने अभिनंदन समारोह के अवसर पर बोल रहे थे। इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति एएम खानविलकर का कहना है कि विभिन्न न्यायालयों में मामलों की बढ़ती पेंडेंसी को लेकर सभी को समन्वित प्रयास करने होंगे, तभी इन मामलों का निराकरण हो सकेगा। क्योंकि अधीनस्थ न्यायालयों में दीवानी प्रकरण करीब सवा तीन लाख पेंडिंग हैं जबकि फौजदारी के 14 लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं। इसी तरह हाईकोर्ट में करीब ढाई लाख से ज्यादा मामले सिविल के लंबित हैं जबकि क्रिमिनल के डेढ़ लाख से ज्यादा मामले पेंडिंग चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरे देश के परिपेक्ष में यह आंकड़ा कम है। मगर इन्हें खत्म करने के लिए हमें लंबित मामलों के लिए मेडिएशन और लोक अदालत जैसे सुविधाजनक रास्ते अख्तियार करना चाहिए। वहीं उन्होंने वकीलों को नसीहत देते हुए कहा कि अनावश्यक रूप से वे मामले को स्थगित नहीं कराएं।
सुप्रीम कोर्ट जज खानविलकर जीवाजी विश्वविद्यालय के मल्टी आर्ट कांपलेक्स में आयोजित सुप्रीम कोर्ट के जज जेके माहेश्वरी के अभिनंदन समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में अपने उद्गार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने न्यायमूर्ति माहेश्वरी के कार्य करने की शैली की तारीफ करते हुए कहा कि जरूरतमंद को सस्ता सुलभ और जल्द न्याय मिले। इसका उन्होंने हमेशा प्रयास किया है। साथ ही उन्होंने अपने दायित्वों का बखूबी पालन किया है। कार्यक्रम में जस्टिस माहेश्वरी का हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से सम्मान किया गया। 
अपने अभिनंदन पर जस्टिस माहेश्वरी ने कहा कि विधि व्यवसाय को अपनाने वाले अधिवक्ताओं को अपने सीनियर से विनम्र होकर सीखने की ललक के साथ काम करना चाहिए। उन्हें असफल होने पर चिंता नहीं करनी चाहिए। उन्होंने अपने वकालत और हाई कोर्ट जज के रूप में कई अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि अपनी गलती को बिना किसी झिझक के स्वीकार कर लेना चाहिए। इससे अधिवक्ताओं के आगे बढऩे का मार्ग प्रशस्त होता है। जस्टिस माहेश्वरी ने अपने उद्बोधन में हरिवंश राय बच्चन, अटल बिहारी वाजपेई और निदा फाजली जैसे कवियों की पंक्तियों का उद्धरण लिया। उन्होंने कहा कि किसी झिझक की वजह से नवोदित वकीलों को हार नहीं माननी चाहिए। उन्हें हमेशा हनुमान जी की तरह सूर्य से प्रेरणा लेने की कोशिश करना चाहिए। क्योंकि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है। इस मौके पर जस्टिस माहेश्वरी का बार एसोसिएशन की ओर से अभिनंदन किया गया।