अभी तक नहीं बना हजार बिस्तर का अस्पताल सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल में भी डॉक्टरों की कमी

Dec 03 2021

ग्वालियर। कोरोना महामारी की तीसरी लहर की दस्तक दे चुकी हैं, लेकिन जेएएच के लोड़ को कम करने के लिए जिस हजार बिस्तर के अस्पताल को बनाए जाने की योजना तैयार की गई थी उसका काम लगातार लेट होता जा हरा है। यहां पर पहले फेस में सी लॉक हेंड ओवर किए जाने की लिमिट अगस्त तय की गई थी, लेकिन निर्माण एजेंसी की लेटलतीफी की वजह से अभी तक यह अस्पताल जीआरएमसी को हैंड ओवर नहीं हो पाया हैं जबकि जेएएच में बच्चों से लेकर मरीज बेड के परेशान हो रहे हैं।
इस मामाले में सरकारी एजेंसी के सभी दावे खोखले ही साबित हो रहे हैं। सबसे पहले 250 बेड का सी लॉक का अस्पताल अगस्त के बाद सितंबर में हैंड ओवर किए जाने की बात कहीं थी, लेकिन इस तिथि पर भी यह अस्पताल नहीं मिल पाया। अब निर्माण एजेंसी ने प्रबंधन के आला अधिकारियों को जनवरी में 500 से अधिक बेड का अस्पताल बनाकर देने की वादा किया है। इस मामले में संभागायुक्त ने निर्माण एजेंसी को अब 26 जनवरी तक का समय दिया हैं अब देखना यह है कि जनवरी में भी यह अस्पताल प्रबंधन का मिल पाता हैं कि नहीं। दूसरी और कोरोना की दोनों लहर में जिस सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल में ग्वालियर जिले सहित संभाग भर के मरीज यहां पर भर्ती हुए थे, लेकिन इस अस्पताल की परेशानी यह है कि यह अस्पताल जिस उद्देश्य से खोला गया था वह पूरा नहीं हो पा रहा है। इस अस्पताल की शुरूआत मरीजों को स्पेशिलिस्ट डॉक्टर उपलब्ध कराने के लिए खोला गया था, लेकिन डॉक्टरों की कमी की वजह से यहां पर मरीजों को स्पेशिलिस्ट डॉक्टरों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस अस्पताल के संचालन के लिए प्रबंधन को 88 स्पेशलिस्ट डॉक्टर चाहिए जबकि वर्तमान में केवल 14 डॉक्टर ही हैं।  बार-बार विज्ञप्ति निकाले जाने के बाद भी डॉक्टर रूचि नहीं दिखा रहे हैं।
वायरल, डेंगू में पड़ी थी बेड की कमी
अंचल के सबसे बड़े जयारोग्य चिकित्सालय समूह के अस्पताल में ग्वालियर के साथ-साथ आसपास के जिलों व राज्यों के मरीज भी उपचार के लिए आते हैं। इसी की वजह से यहां के अस्पताल हमेशा ओवरलोड रहते हैं। इसी के चलते अभी डेंगू के साथ वायरल के प्रकोप अस्पतालों की व्यवस्थाओं की पेाल खोलकर रख दी थी। इस सीजन में डेंगू के संक्रमितों के सारे रिकार्ड टूट गए और रिकार्ड 2600 से अधिक मरीज पॉजिटिव निकल चुके हैं।
डेंगू के साथ-वायरल की वजह से केआरएच सहित अन्य सरकारी अस्पतालों की अभी कुछ दिनों पहले यह हालत थी कि बेड फुल थे और एक-एक बेड पर तीन-तीन बच्चे भर्ती किए जा रहे थे। इसी की वजह से समाजसेवियों ने इस मामले में कोर्ट में याचिका भी लगाई थी। वैसे हर साल सर्दियों का सीजन शुरू होने के बाद डेंगू का प्रकोप कम होता जाता था, लेकिन इस बार अभी भी डेंगू का प्रकोप जारी हैं। 
सीएमचओ ने तैयारियों का लिया जायजा
प्रभारी मंत्री एवं प्रशासन के निर्देश पर तीसरी लहर को लेकर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार सीएमएचओं भी अलर्ट नजर आ रहे है। सीएमएचओ तीसरी लहर की तैयारियों को लेकर अभी हाल ही में जनप्रतिनिधियों के साथ मिल सभी सरकारी अस्पतालों के ऑक्सीजन प्लांट की मॉकड्रिल की तो इसके बाद उन्होंने सीएमएचओ कार्यालय स्थित स्टोर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्हें स्टॉक में 277 ऑक्सीजन सिलेंडर, दस हजार होम आइसोलेशन किट, पीपीई किट एवं 9 हजार एन 95 मॉस्क स्टॉक मिला।
पीआरओ जीआरएमसी डॉक्टर अमित निरंजन ने कहा कि हजार बिस्तर के अस्पताल का निर्माण सरकारी एजेंसी द्वारा किया जा रहा है, जनवरी में करीब 500 बेड बनाकर दिए जाने का बात कहीं गई है। सुपरस्पेशिलिटी में डॉक्टरों की भर्ती के लिए जल्द विज्ञप्ति निकली जाएगी।