संगीत साधकों से भागवत ने की मुलाकात

Nov 28 2021

ग्वालियर। भारतीय संगीत की विरासत को संजोकर रखें और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी आप अपने ऊपर लें। यह बात रविवार की सुबह केदारपुर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में सरसंघचालक मोहन भागवत ने संगीतकारों से मुलाकात में कही। उन्होंने बताया कि पहले संघ का घोष पश्चिमी धुनों पर आधारित होता था, लेकिन बाद में भारतीय संगीत के जानकारों व संघ के स्वयं सेवकों ने मिलकर भारतीय संस्कृ ति पर आधारित रचनाएं तैयार कीं और अब संघ के घोष में इन्हीं रचनाओं का घोष होता है। उन्होंने कहां कि भारतीय संगीत की विरासत काफी बड़ी है और आप सभी को इनको आने वाली पीढ़ी को सांैपना है। इसे जिम्मेदारी के रूप में लें। 
सरसंघचालक मोहन भागवत से मुलाकात के दौरान संगीतकारों ने दो सुझाव रखे कि शिक्षा में भारतीय संगीत को अनिवार्य किया जाए। साथ ही स्कूलों में संस्कृति, साहित्य और कला को शामिल किया जाए। इस पर सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि आप लोगों को जागृत करें और जिससे लोगों का रुझान इस ओर बढ़े, जिससे सरकार संगीत को शिक्षा में शामिल करे। 
संगीतकारों से मुलाकात कार्यक्रम मेें राजा मान सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर साहित्य कुमार नाहर, इलाहबाद से आए जयंत खोत, श्रीराम उमड़ेकर, साधना मोरे, पंडित सुनील पावगी, वीणा जोशी, संजय धवले, अभिजीत सुखहाड़ आदि शामिल थे। 
सरोदघर व आरएसएस कार्यालय पहुंचे भागवत
रविवार शाम को सरसंघचालक मोहन भागवत जीवाजीगंज स्थित सरोद घर पहुंचें और इसके बाद नई सड़क स्थित संघ कार्यालय राष्ट्रोत्थान न्यास  गए और यहां पर संघ पदाधिकारियों से चर्चा करी। सरसंघचालक के आगमन से पहले ही संघ कार्यालय व सरोदघर को फूलों से सजाया गया था। 
घोष वादकों की कला के प्रदर्शन से हुआ समापन
तीन दिवसीय स्वर साधक संगम शिविर का समापन रविवार शाम साढ़े चार बजे हुआ। जहां पर शिविर में शामिल साढ़े पांच सौ घोष वादकों ने अपनी कला का प्रदर्शन सरसंघचालक मोहन भागवत के सामने किया। कार्यक्रम में स्वयं सेवक तथा उनके परिजनों के साथ ही आमजन शामिल रहे।