ग्वालियर की बेटी की उत्तराखंड के आइटीबीपी ट्रेनिंग कैंप संदिग्ध मौत

Nov 28 2021

ग्वालियर। ग्वालियर की एक जांबाज बेटी की उत्तराखंड के आइटीबीपी ट्रेनिंग कैंप में संदिग्ध हालात में मौत हो गई है। ट्रेनिंग के बाद कैंप में गई शिवकुमारी अचानक जमीन पर गिर पड़ी। इसके बाद उसे हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया है। ग्वालियर डबरा में रहने वाली शिवकुमारी पिता का सपना पूरा करने फोर्स में गई थी। रविवार को उसका पार्थिव शरीर उत्तराखंड से ग्वालियर पहुंचा। यहां गार्ड ऑफ ऑनर के साथ उसका अंतिम संस्कार किया गया। उसकी मौत को लेकर अभी भी अटकलें हैं। आइटीबीपी ने उनके परिजन को बेटी के बीमार होने की बात कही है, लेकिन परिजन अभी इस संबंध में कोई आरोप नहीं लगा रहे हैं।
ग्वालियर के डबरा में ठाकुर बाबा रोड रामनिवास कॉलोनी निवासी राजाराम बाथम की बेटी शिवकुमारी बाथम (19) का इसी वर्ष आइटीबीपी (इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस) में बतौर आरक्षक सिलेक्शन हुआ था। सिलेक्शन होने के बाद शिवकुमारी आइटीबीपी ट्रेनिंग कैंप के लिए उत्तराखंड के लिए आई थी। यहां ट्रेनिंग के दौरान आरक्षक शिवकुमारी की संदिग्ध हालात में मौत हो गई है।
शनिवार को अचानक वह बेहोश होकर गिरी और उसको हॉस्पिटल पहुंचाया गया तो वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। अचानक बेटी की मौत की खबर सुनते ही बाथम परिवार में कोहराम मच गया। जब परिजन ने आइटीबीपी के अफसरों से बात की तो वहां से जवाब मिला है कि वह बीमार थी। बीमारी के कारण उसकी मौत हुई है, लेकिन क्या बीमारी थी यह परिजन को अभी पता नहीं चला है।
8 बहन भाई-बहनों में 5वें नंबर की थी शिवकुमारी
शिवकुमारी बाथम घर में 8 बहन भाई हैं। उसके 6 बहनें और दो भाई हैं। वह पांचवे नंबर की थी। ऐसा पता लगा है कि शिवकुमारी के पिता चाहते थे कि उनके घर से कोई फोर्स में जाकर परिवार का नाम रोशन करे। इस पर शिवकुमारी ने लगातार फोर्स में जाने की तैयारी की और उसका सिलेक्शन आइटीबीपी में हो गया। अभी वह ट्रेनिंग कैंप के लिए आइटीबीपी बेस कैंप उत्तराखंड में थी तभी यह हादसा हो गया।
गार्ड ऑफ ऑनर के बाद अंतिम संस्कार
रविवार दोपहर नव आरक्षक शिवकुमारी बाथम की पार्थिव देह पूरे सम्मान के साथ ग्वालियर लाई गई। पहले यहां डबरा पुलिस दोबारा पोस्टमार्टम कराने की बात कह रही थी, लेकिन बाद में पोस्टमार्टम नहीं कराया गया है। गांव में ही डबरा की बेटी के पार्थिव देह को रखा गया। दोपहर बाद उसे गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और फिर अंतिम संस्कार किया गया।
किसी को भरोसा नहीं हुआ
शिवकुमारी शुरू से ही काफी बहादुर थी और डिफेंस में जाना उसका सपना था। जिसके लिए उसने जी तोड़ मेहनत की थी। जब स्वजनों को उसकी मौत की सूचना मिली तो पहले तो किसी को भरोसा ही नहीं हुआ।