लक्ष्मी नारायण मंदिर में मनाया गया भगवान हरिहर का प्राकट्य उत्सव

Nov 17 2021

ग्वालियर। जनकगंज स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में वार्षिकोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह वार्षिकोत्सव 22 नवंबर तक मनाया जाएगा। वार्षिकोत्सव के दौरान आज बैकुंठ चतुर्दशी पर मंदिर में स्थापित भगवान विष्णु की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर के पुजारी संजय लव्हाटे ने बताया की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बैकुंठ चतुर्दशी को विष्णु और शिव का मिलन हुआ था। जिसके पश्चात ही भक्तों को श्री विष्णु और शिव के हरिहर रूप में दर्शन हुए थे, तभी से आज के दिन भगवान के हरिहर रूप की पूजा होती है।
आज भगवान हरिहर का अवतरण दिवस है, इसलिए मंदिर में प्रभु का विशेष श्रृंगार के साथ पूजा अर्चना की गई। इस दौरान भगवान विष्णु को पीतांबर, मुकुट आदि पहनाकर उनका अत्यंत सुंदर श्रृंगार किया गया। साथ ही धूप-दीप, चंदन तथा पुष्प अर्पित कर श्रीमद्भगवद्गीता, विष्णुसहस्त्रनाम और श्री सूक्त के पाठ का आयोजन मंदिर में पुजारी एवं भक्तों द्वारा किया गया। वार्षिकोत्सव के कार्यक्रमों की श्रृंखला में 19 नवंबर को भक्त भगवान के मत्स्यावतार के दर्शन करेंगे। 20 नवंबर को श्रीजी की पालकी यात्रा का आयोजन होगा। 22 नवंबर को पातल भाजी का वितरण किया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक जब देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु जागते हैं तो सभी देवी-देवता इसकी खुशियां मनाते हैं। भगवान शिव बैकुंठ चतुर्दशी के दिन ही भगवान विष्णु को सृष्टि का सारा कामकाज दोबारा सौंपते हैं। इस दिन बैकुंठ लोक के द्वार खुले रखे जाते हैं, जो भी विधि-विधान से इस दिन व्रत और पूजा करता है वो मृत्यु के बाद बैंकुठ लोक में निवास करता है।