सत्य का संबंध केवल बोलने से नहीं, व्यक्ति के आचरण से भी रहता है-मुनिश्री

Nov 14 2021

ग्वालियर। जीवन में व्यक्ति को मन, वचन और शरीर के द्वारा सत्य का आचरण करना चाहिए। सत्य का संबंध केवल बोलने से ही नहीं, व्यक्ति के आचरण से भी रहता है। जिसके मन में सत्य का वास होता है, उसका चारित्र अपने आप ही शुद्ध हो जाता है। आज के इस भौतिक एवं वैज्ञानिक युग में जीवन के सुख-साधन अवश्य बढ़े हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश सत्य से मानव की आस्था गिरी है। यह विचार मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने चौथे दिन रविवार को उपग्वालियर लोहमंडी लाल गोकुलचंद जैन मदिंर में अयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। मुनिश्री विजयेश सागर महाराज मुनिश्री विनिबोध सागर महाराज एवं ऐलक विनियोग सागर भी मौजूद थे।
मुनिश्री ने कहा कि व्यक्ति का ऐसा विश्वास बन गया है कि झूठ के बिना उसे जीवन के विपुल सुख-साधन तथा समृद्धि प्राप्त नहीं हो सकती, इसलिए छल-कपट और धोखाधड़ी का आश्रय लेकर वह अपने अभीष्ट उद्देश्यों की पूर्ति में लगा रहता है। मुनिश्री ने कहा कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में इसीलिए आज परेशानियां दिखाई देती हैं और सर्वत्र अन्याय तथा अनीति का वातावरण बना हुआ है। इस से एक नहीं, अपितु सारे दुखी हैं। मुनिश्री के चरणो में मंदिर समिति के अध्यक्ष पदमचंद जैन, महामंत्री देवेद्र जैन, दिलीप जैन, नवरंग जैन, अभिलाश जैन, राहुल जैन, मनीष जैन, राकेश जैन, अलोक जैन, राजुल जैन श्रीफल भेंटकर आर्शीवाद लिया।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि सिद्धचक्र महामंडल विधान प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी राकेश जैन ने मंत्रउच्चारण के साथ सौधर्म इंद्रा पदमचंद हुकमचंद जैन प्रथम कलश से जिनेंद्र देव के ऊपर जलाभिषेक जयकारों के साथ किया। मुनिश्री ने अपने मुख्यबिंद से भगवान जिनेंद्र की शांति धारा करने का सौभाग्य राजेश पदमचंद जैन परिवार ने की।
इस विधान में इंद्रा-इंद्राणियो ने पीले वस्त्र धारण कर सिर पर मुकुट गले में माला पहनकर शुभम जैन सैमी के भजनो के साथ भक्ति भाव से पूजा आर्चन कर मैना सुंदरी बबिता पदमचंद जैन के द्वारा सिध्दप्रभू की आराधना कर 64 महाअर्घ जिनेन्द्र देव के सामने मढऩे समर्पित किए गए।