भोपाल हादसे के बाद ग्वालियर में अलर्ट- ग्वालियर के केआरएच में 56 बेड पर भर्ती हैं 150 से ज्यादा बच्चे
Nov 09 2021
ग्वालियर। भोपाल के हमीदिया स्थित कमला नेहरू हॉस्पिटल के एसएनसीयू में आग और 7 बच्चों की मौत के बाद ग्वालियर के केआरएच में भी प्रबंधन अलर्ट मोड़ पर आ गया है। पर उसके बाद भी यहां 56 बेड के एसएनसीयू में 150 से ज्यादा बच्चे मरीज भर्ती हैं। ऐसे में भोपाल जैसी घटना होती है तो बच्चों को भगदड़ के बीच शिफ्ट करना मुश्किल हो जाएगा। 6 नवंबर को महाराष्ट्र के अहमद नगर की घटना के बाद ही जेएएच प्रबंधन अलर्ट हुआ था। दो दिन पहले ही फायर सेफ्टी का पूरा ऑडिट किया गया है। हर दो वार्ड में आग पर काबू पाने के लिए तीन-तीन अग्नि शमन यंत्र लगे हैं। पर यहां बच्चे मरीजों की संख्या सबसे बड़ी आफत बन सकती है।
उनको हैंडल करना मुश्किल हो जाएगा। नवंबर 2020 में भी सुपर स्पेशयलिटी में आग लगी थी। अफरा तफरी के बीच दो मरीजों की मौत हुई थी। कमलाराजा हॉस्पिटल के एसएनसीयू का निरीक्षण किया। यहां फायर उपकरण तो थे, लेकिन भर्ती बच्चों की संख्या अपने आप में एक संकट है। यहां एक बेड पर दो से तीन बच्चे भर्ती हैं। यदि ऐसे घटना होती है तो हालात बेकाबू हो जाएंगे।
भोपाल की घटना के बाद से अस्पतल में अलर्ट
सोमवार को भोपाल के हमीदिया स्थित कमला नेहरू हॉस्पिटल में वेंटीलेटर में शॉर्ट सर्किअ से लगी आग के बाद मची भगदड़ और धुंआ भरने से दम घुटने और शिफ्टिंग के दौरान 7 बच्चों की मौत की खबर है। प्रदेश की यह बड़ी घटना है। ऐसे में ग्वालियर में जेएएच प्रबंधन अलर्ट मोड़ पर आ गया है। दो दिन पहले महाराष्ट्र के अहमदनगर में भी घटना के बाद ही फायर ऑडिट कराया गया है। हर दो वार्ड के बीच 3-3 अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं। 100 फायर उपकरण पुराने हैं और 100 अभी नए खरीदते हैं। कर्मचारियो को इसके उपयोग के लिए भी ट्रेंड किया गया है।
बच्चों की संख्या से ही है खतरा
ग्वालियर अंचल में इस समय डेंगू चरम पर है और यहां डेंगू से सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। यदि 50 डेंगू पॉजिटिव निकलते हैं तो उनमें से 30 बच्चे होते हैं। ऐसे में ग्वालियर के केआरएच के एसएनसीयू में हालत खराब है। यहां 56 बेड हैं जहां 150 से ज्यादा बच्चे भर्ती है। यह हालत है कि यहां एक-एक बेड पर दो से तीन बच्चों को भर्ती करना पड़ता है। यही संख्या यहां के प्रबंधन के लिए बड़ी आफत है। यहां फायर उपकरण हैं, एसएनसीयू प्रथम मंजिल पर है, लेकिन यदि भोपाल जैसी आगजनी होती है तो इतनी संख्या में बच्चों को शिफ्ट करना अपने आप में चुनौती होगा। भोपाल से बड़ी त्रासदी यहां हो सकती है।
बिजली की वायरिंग और उपकरण को बार-बार चेक करा रहे हैं
अस्पताल में आग की सबसे बड़ी वजह शॉर्ट सर्किट होती है। इसके लिए इलेक्ट्रीसिटी ऑडिट कराया जाता है। भोपाल की घटना के बाद जेएएच अधीक्षक आरकेएस धाकड़ ने सभी को निर्देशित किया है कि अपने-अपने विभाग में फायर और इलेक्ट्रीसिटी उपकरण के ऑडिट को करा लें। जिससे इस तरह की कोई भी स्थिति न बने।
इस मामले में जेएएच अधीक्षक आरकेएस धाकड़ का कहना है कि वैसे तो दुर्घटना बताकर नहीं आती है, लेकिन इस तरह के हालात बनते हैं तो हम हर स्थिति से निपटने तैयार हैं। जब उनसे एसएनसीयू में 56 बेड पर 150 से अधिक बच्चे भर्ती होने की बात और वहां किस तरह हालात काबू करने का सवाल किया गया तो वह ज्यादा कुछ नहीं कह पाए। इससे साफ है कि भर्ती मरीजों की संख्या अपने आम में बड़ी परेशानी बन सकती है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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