दिवाली पर 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के 2548 वें निर्वाण एवं गौतम गणधर स्वामी के केवल ज्ञान महोत्सव आयोजित हुआ

Nov 06 2021

ग्वालियर। कार्तिक अमावस्या दिवाली पर 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के 2548 वें निर्वाण महोत्सव एवं शाम को गौतम गणधर स्वामी के केवल ज्ञान महोत्सव पर मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज, मुनिश्री विजयेश सागर महाराज, मुनिश्री विनिबोध सागर महाराज एवं ऐलक विनियोग सागर महाराज के मंगल सानिध्य में अभूतपूर्व वर्षायोग समिति व जैन मिलन ग्वालियर के तत्वावधान में नई सड़क स्थित चंपाबाग धर्मशाला में भगवान महावीर स्वामी की मोक्ष स्थली पावापुरी जलकुंड मंदिर की भव्य रचना कर निर्वाण लाडू चढ़ाने व देखने के लिए धर्मावलंबियों का आस्था का हुजूम उमड़ पडा।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में पंडित सुनील भंडारी ने मंगलाष्टक के बाद पीले वस्त्रों में इंद्रो ने भगवान महावीर स्वामी का 108 रिद्धि मंत्रों से अभिषेक जयकारों के साथ किया। मुनिश्री ने अपने मुख्यबिंद से मंत्रो का उच्चारण कर अनिल कुमार ने भगवान की शान्तिधारा की। मुनिश्री के चरणों मे श्री फल वर्षायोग कमेटी के डॉ वीरेंद्र गंगवाल, महेंद्र टोंग्या, प्रवीण गंगवाल, विनय कासलीवाल, अध्यक्ष योगेश बोहरा, आशीष जैन, मिखिल जैन, पंकज बाकलीवाल, अनिल जैन, आदि ने आशीर्वाद लिया।
मुनिश्री के सानिध्य में निर्वाण काण्ड पूजन के बाद संगीतकार शुभम जैन सैमी के भजनों पर भक्ति नृत्य करते हुए निर्वाण लड्डू प्रथम सम्यक दर्शन रश्मि जैन परिवार, दूसरे सम्यक ज्ञान विवेक शिल्पी बिलाल दिल्ली, तीसरे सम्यक चारित्र शिव दयाल अभिषेक जैन ग्वालियर एवं अनिल दीपिका जैन परिवार सहित जैन समाज के लोगों ने जयकारों के साथ लड्डू समर्पित किया। भगवान महावीर स्वामी पावापुरी तीर्थ से मोक्ष गए थे। मगर चातुर्मास कमेटी के द्वारा चंपाबाग धर्माशाला में पांडाल के बीचों बीच विशाल जलकुंड पावापुरी मंदिर की रचना की गई। ऐसा लग रहा था, मानो पावापुरी में ही भगवान के चरणों में लड्डू समर्पित कर रहे हों।
महावीर स्वामी ने राजपाट छोड़कर मोक्षमार्ग चुना-मुनिश्री
मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने कहा कि जैनागम में आत्मा द्वारा शरीर को त्यागने को शोक का नहीं हर्ष का विषय बताया गया है जैनागम के अनुसार जब आत्मा भौतिक सुखों को त्यागकर जन्म मरण के बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष मार्ग को अग्रसर होती है वह परम सुख है। महावीर स्वामी ने राजपाट छोड़कर मोक्षमार्ग चुना। जिनके सिद्धांत आज के युग में और अधिक प्रासंगिक हो गए है।
ग्वालियर के इन 85 जैन मंदिरो में निर्वाण लडडू समर्पित हुए
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि 04 नबंबर को भगवान महावीर स्वामी के 2548 वां मोक्षकल्याण निर्वाण एवं भगवान महावीर के प्रमुख गणधर गौतम स्वामी को भी कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति पर ग्वालियर सकल जैन समाज के श्रद्धालुओ ने जैन सिद्धक्षेत्र गोपाचल पर्वत पर पंच कल्याणक विधान पूजा व निर्वाण पूजन के उपरात संगीतमय भजनों के साथ निर्वाण लड्डू समर्पित किया। वही स्वर्ण जैन मंदिर, बीसपंथी चम्पाबाग जैन मंदिर, जैसवाल जैन मंदिर दाना ओली, मुनिसुव्रतनाथ शिंदेकी छावनी, तेरहपंथी शांतिनाथ जैन मदिर भाउ का बाजार, तेरहपंथी दिगंबर जैन मदिर दौलतगंज, उपग्वालियर लोहमंडी लाला गोकुलचंद जैसवाल जैन मदिंर,  मुरार दिगंबर जैन पंचायती मदिर, दिगबर जैन मंदिर दीननाथ ठेकेदार की बागिची, सिकदर कम्पू शांतिनाथ जिनलाय, मामा का बाजार दिगबर जैन वरैया मदिर, दाना ओली दिगंबर जैन वरैया जैन, डीÓडी नगर जैन मंदिर, पनिहार जैन मदिर, मुरार सीपी कालोनी जैन लाला मदिर, नया बाजार जैन मदिर, सहित 85 जैन मंदिरो में निर्वाण लड्डू समर्पित कर भगवन के जयकारों से गूँजे।