दो महीने बाद नन्हे टाइगर्स के दीदार

Nov 03 2021

ग्वालियर। चिडिय़ाघर (जू) में व्हाइट टाइगर 'मीराÓ के दो नन्हे शावकों को करीब दो महीने बाद पहली बार बुधवार को खुले आसमान के नीचे लाया गया। अभी तक वह हाउसिंग में समय गुजार रहे थे। नरक चतुर्दशी के मौके पर उन्हें पब्लिक के सामने लाया गया। गुनगुनी धूप में आते ही दोनों शावकों ने खूब अठखेलियां कीं। वह मां के साथ दौड़े। उसके पीछे-पीछे घूमते रहे। जब मां ऊंचाई पर जाकर बैठ गई, तो दोनों ने चढऩे का प्रयास किया। जब नहीं चढ़ पाए, तो नाराज भी हुए। गुस्से में नीचे बैठ गए। बच्चों का मां के साथ खेलना देखकर सैलानियों ने भी खूब आनंद लिया। अब शवकों को रोजाना दोपहर 12 से 2 बजे के बीच हाउसिंग से बाहर ओपन एरिया में लाया जाएगा।
ग्वालियर के गांधी प्राणी उद्यान में 31 अगस्त की रात व्हाइट टाइगर 'मीराÓ ने दो शावकों का जन्म दिया था। इनमें एक पीला (नर) दूसरा सफेद (मादा) है। नन्हें टाइगरों को डॉक्टरों की टीम ने हाउसिंग में अपनी निगरानी में रखा था। यहां मां मीरा का दूध पीकर बच्चे पल रहे थे। वैसे भी, विश्व में करीब एक सैकड़ा व्हाइट टाइगर हैं। उनमें से मीरा और उसका नया शावक भी शामिल हैं।
बुधवार को छोटी दीपावली पर करीब दो महीने बाद शावकों को पहली बार दोपहर 12 से दो बजे के बीच हाउसिंग एरिया से खुले आसमान में बाहर लाया गया। बाहर धूप में आकर टाइगर के बच्चे खुश नजर आए। उन्होंने खूब अठखेलियां कीं। मां के साथ खेले और दौड़-भाग भी की।
आपके दिए नामों से शावकों को मिलेगी पहचान
इस दौरान चिडिय़ाघर में आने वाले सैलानियों से शावकों के नामकरण के लिए पर्ची पर नाम लिखवाए गए हैं। चिडिय़ाघर में दोपहर 12 से 2 बजे के बीच 57 सैलानियों ने प्रवेश किया था। सभी से दोनों शवकों को नाम लिखवाए गए। किसी ने नर शावक का नाम गोलू और मादा शावक का नाम डोली रखने का सुझाव दिया। लोगों के सुझाव, उनके नाम और मोबाइल नंबर के चिडिय़ाघर के गेट पर रखे रजिस्टर में ले लिए गए हैं। दो दिन इसी तरह नाम लिए जाएंगे। उसके बाद इन्हीं में से कोई दो अच्छे नामों का चयन कर इनका नामकरण किया जाएगा।
सर्दी में धूप के लिए दोपहर 12 से 2 बजे तक बाहर रहेंगे
सर्दी का सीजन शुरू हो चुका है। शावकों को धूप के लिए उनके हाउसिंग से बाहर लाना जरूरी है, इसलिए दोपहर 12 से 2 बजे का समय तय किया गया है। इसके बाद समय में बढ़ोतरी भी की जाएगी। जब सर्दी बढ़ेगी, तो अन्य इंतजाम भी किए जाएंगे।
मटन खाना भी कर रहे हैं शुरू
उद्यान के क्यूरेटर गौरव परिहार ने बताया कि शावकों के जन्म के बाद से पहली बार उन्हें एनक्लोजर में निकाला गया है। जन्म के दौरान मादा सफेद शावक का स्वास्थ्य ठीक नहीं था। डॉक्टर और प्रबंधन से जुड़े स्टाफ की मेहनत के बाद शावकों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। अब सर्दियों में धूप जरूरी है। उन्होंने बताया कि शावक अभी तो मां के दूध पर ही निर्भर हैं, लेकिन धीरे-धीरे उनको मटन भी दिया जा रहा है। अभी वह मां के साथ उसे चख रहे हैं। धीरे-धीरे मटन खाना सीख रहे हैं।