दुर्गा प्रतिमा और जवारों का विसर्जन, नवरात्र का समापन

Oct 15 2021

ग्वालियर। शक्ति की आराधना का पर्व, शारदीय नवरात्र का शुक्रवार को समापन हुआ। 9 दिन पूरे होने पर दशहरे पर मां की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। शुक्रवार को विसर्जन से पूर्व दुर्गा प्रतिमा का गंध, चावल, फूल, आदि से पूजा हुई, जिसके पश्चात दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ और ज्वारों का भी विसर्जन किया गया। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि इससे नौ दिनों तक जवारों में व्याप्त शक्ति हमारे भीतर प्रवेश करती है।
हमारी सनातन परंपरा में विसर्जन का विशेष महत्व है। विसर्जन अर्थात पूर्णता फिर चाहे वह जीवन की हो, साधना की हो या प्रकृति की। जिस दिन कोई वस्तु पूर्ण हो जाती है, तो उसका विसर्जन जरूरी हो जाता है। आध्यात्मिक जगत में विसर्जन समाप्ति की निशानी नहीं, अपितु पूर्णता का संकेत है। नवरात्र के ये 9 दिन इसी बात की ओर संकेत हैं कि हमें अपनी साधना में किसी एक आकार पर रुकना या अटकना नहीं है, अपितु साधना की पूर्णता करते हुए हमारे आराध्य आकार को भी विसर्जित कर निराकार की उपलब्धि करना है। 
बंगाली सोशल एंड कल्चरल एसोसिएशन द्वारा आयोजित 29वें नवरात्रि महोत्सव के अंतिम दिन मानस भवन में शुक्रवार को महादशमी का पूजन हुआ। पूजन के बाद दर्पण विसर्जन किया गया। दर्पण विसर्जन के बाद महिलाओं ने मां दुर्गा को बॉरोन कर उन्हें सिंदूर लगाया, साथ ही आपस में सिंदूर खेला। दोपहर बाद मां दुर्गा के विसर्जन के लिए चल  समारोह निकाला गया।
विसर्जन के लिए करना पड़ रहा इंतजार
नवरात्रि का पर्व खत्म हो गया है लेकिन विसर्जन का सिलसिला आज भी जारी है। नवमीं तिथि पर भक्तों द्वारा देर रात तक भंडारे के आयोजन किए गए और प्रसादी वितरित की गई, जिसके चलते वह महामाई की प्रतिमा का विसर्जन नहीं कर सके शुक्रवार सुबह से ही सागरताल में प्रतिमाओं का विसर्जन करने के लिए भक्तों की भीड़ लगी है, इस दौरान कोई घटना घटित न हो जाए इसे देखते हुए भक्तों को पानी में नहीं जाने दिया, गोताखोर मूर्तियों का विसर्जन कर रहे हैं।