भक्तों ने की मां ब्रह्मचारिणी की आराधना पैदल पहुंचे मंदिर, किए दर्शन

Oct 08 2021

ग्वालियर। नवरात्र के दूसरे दिन भक्तों ने मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की। ब्रह्मचारिणी भी मां दुर्गा का एक अवतार हैं। शास्त्रों में लिखा है कि ब्रह्मचारिणी का अर्थ है तपस्या करने वाली देवी। उनके दाहिने हाथ में नामजप की माला है और उनके बाएं हाथ में कमंडल है। तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि के लिए भक्तों ने माता की आराधना की। नवरात्र के दूसरे दिन बड़ी संख्या में भक्तों ने मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की।
नवरात्र महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को शीतला माता मंदिर पर भक्तों की अपार भीड़ रात से ही लगी हुई है। शुक्रवार होने के कारण शीतला माता जाने वाले भक्त रातभर पैदल चलते हुए तड़के मंदिर में पहुंचे और आरती में शामिल हुए। मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए भारी तादात में पुलिस बल लगा हुआ है। नवरात्र के दूसरे दिन शुक्रवार को तड़के से ही पैदल जाने वालों की भीड़ नजर आ रही थी तो वहीं शीतला माता जाने के लिए टोलियों के रूप में भक्त माता के जयकारे लगाते हुए जा रहे थे। आलम यह है कि शीतला माता मंदिर पर भोर होते ही भ?तों की लम्बी कतारें दर्शन करने के लिए लगी हुई हैं और पूजा अर्चना करते हुए महामाई से खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
शीतला माता मंदिर पर दुकानों के आसपास भी खरीदारी करने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। माता का शृंगार खरीदकर अर्पित कर रहे हैं तो हरी चूडिय़ां महिलाएं पहन रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो इसको देखते हुए पुलिस अफसर भी निगाह बनाए हुए हैं।
आज होगी मां चंद्रघंटा की पूजा
नवरात्र के तीसरे दिन दुर्गाजी के तीसरे रूप चंद्रघंटा देवी के वंदन, पूजन और स्तवन करने का विधान है। इन देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्ध चंद्रमा विराजमान हैं इसलिए इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। इस देवी के दस हाथ माने गए हैं और ये खड्ग आदि विभिन्न अस्त्र और शस्त्र से सुसज्जित हैं। ऐसा माना जाता है कि देवी के इस रूप की पूजा करने से मन को अलौकिक शांति प्राप्त होती है और इससे न केवल इस लोक में अपितु परलोक में भी परम कल्याण की प्राप्ति होती है।