डिजीटल युग में शहर से गायब हो गए कई इलाकों से लेटर बॉक्स

Oct 08 2021

ग्वालियर। आपको लेटर बाक्स तो याद है न, आप जब छोटे थे तो माता और पिता आपके हाथ में चि_ी देकर उसे पोस्ट करने के लिए घर के पास स्थित लैटर बॉक्स में डालने के लिए भेजते थे। और हम खुशी-खुशी पत्र लेकर लैटर बॉक्स में ड्रॉप करने सहपाठियों के साथ जाते थे। अब वह बीते समय की बात हो चुकी है।
आज इंटरनेट का राज है। इस डिजीटल दौर में मोबाइल, इंटरनेट मीडिया आदि के माध्यम से ही हजारों किमी दूर बैठे लोगों से सैंकडों में बात ही नहीं हो जाती बल्कि फेस टू-फेस आप एक दूसरे को देख भी सकते है। अब पोस्टल डिपार्टमेंट के लेटर बाक्स का कोई मायने नहीं रह गया है। हालांकि अभी भी इसका प्रयोग शहरवासी न के बराबर करते है। इंटरनेट के इस युग ने एक-दूसरे के बीच की दुरियां सिमट कर रह गई हैं। इस डिजीटली युग के पत्राचार का आदान-प्रदान बीते युग की बात हो चुकी है। हालंाकि शहर में पोस्टल डिपार्टमेंट 27 उप डाकघर संचालित कर रहा है। लेकिन इन डाकघरों से पोस्टकार्ड, अंतरदेशीय, व लिफाफे की बिक्री महज पांच से सात फीसदी तक जा सिमटी है। 
शहर में 40 लेटर बॉक्स
ग्राहकों की सुविधा के लिए प्रधान डाकघर, उप डाकघर व सभी डाकघरों की शाखा सहित शहर के कई मुख्य बाजारों में पोस्टल डिपार्टमेंट द्वारा कुल 40 लेटर बॉक्स नियमित रुप से काम कर रहे है। इन लेटर बॉक्स में डाली जाने वाली डाक सुबह साढ़े दस बजे व शाम साढ़े चार बजे नियमित डाक विभाग के कर्मचारियों द्वारा निकाल कर इन्हें स्टेशन स्थित एमओएस कार्यालय पहुंचाया जाता है। इन सभी लेटर बॉक्स से निकाली जाने वाली डाक की मॉनीटरिंग विभाग के एप द्वारा की जाती है।
पहले 8 हजार अब दो हजार भी नहीं
पोस्टल डिपार्टमेंट के अफसरों ने बताया कि आज से दस साल पहले तक शहर के सभी डाकघरों के साथ ही लेटर बॉक्स से रोजाना लगभग आठ हजार पत्र का कलेक्शन होता था, जो वर्तमान में सिमट कर महज एक से डेढ़ हजार के बीच जा पहुंचा है। इसमें से सत्तर फीसदी सरकारी डाक होती है। 
आपने कहा
यह बात सही है कि डिजीटल युग में शहर से बाहर भेजे जाने वाले पत्रों की संख्या में अस्सी फीसदी तक कमी आई है। लेकिन पोस्टल डिपार्टमेंट की स्पीड पोस्ट सेवा का शहरवासी अस्सी फीसदी तक उपयोग कर रहे है। आज भी नियमित रुप से डाक शहर से बाहर भेजी जा रही है।
बृजेश शर्मा, पोस्ट मास्टर