वृद्धजन ज्ञान की परिपक्वता के फल होते है

Aug 11 2021

ग्वालियर। माधव बाल निकेतन एवं वृद्धाश्रम में परम पूज्य महामंडलेशवर संत संतोषानंद ने वृद्धों को बताया कि जीवन का स्वरूप क्या है और क्यों है। जैसे वयकति जहां रहते है वैसा ही वातावरण निर्मित हो जाता है। वेदों का फल भागवत गीता है। सेवा को अधिक महत्व देना चाहिए। जब जब होवे धर्म की हानि... भगवान का अवतार धर्म के स्वरुप के लिए होता है। हर कण कण में राम है। सेवक की बात स्वामी मानते है। हनुमान जी के कहने पर राम जी ने संत तुलसी दास को दर्शन दिए। सेवक और स्वामी के संबंध मे कई कथाएं संत ने वृद्ध माता पिताओं को बताई। 
संत ने श्रीराम जय राम जय जय राम......सीताराम सीताराम जय जय सीताराम... जय सियाराम जय जय हनुमान.... सहित कई भजनों को गाकर वृद्धों को भगवान राम की महिमा बताई। भगवान ने ही कहा है भक्त मुझकों दूना प्यारा है। धर्म अपनी, परिवार, देश की रक्षा करना भी है। राम को पहचानने के लिए मन मे पूर्ण सेवा भाव होना चाहिए। हम अपने पूर्व के संस्कारों को ही भोगते है। जब संकट आता है कही से भी आए तो सबको मिलकर भगवान की स्तुति करना चाहिए। सत्संग से पहले संस्था परिसर में स्थित माता का पूजन महामंडलेशवर संतोषानंद द्वारा किया गया। इसके बाद संस्था पदाधिकारीयों द्वारा संत को शाल श्रीफल देकर उनका पूजन किया। संत ने गुरू और परमात्मा के संबंध में बहुत सी कथाओं का वर्णन किया।
इस अवसर पर माधव बाल निकेतन एवं वृद्ध आश्रम के चेयरमैन नूतन श्रीवास्तव, अध्यक्ष पवन भटनागर, मनोज दुबे, श्याम श्रीवास्तव, श्रीमती सीमा सक्सेना, सहित हमारे आसपास के भक्तजन भी एकत्र थे।