कांग्रेसियों ने सड़क के गड्ढों में रोपे पौधे

Aug 06 2021

ग्वालियर। तमाम मुद्दे हाथ में होने के बावजूद कांग्रेस भले ही लगातार और बड़ा आंदोलन न छेड़ पा रही हो, लेकिन सरकारी का विरोध करने के नए-नए तरीके जरूर अपना रही है। शुक्रवार सुबह कांग्रेस ने फूलबाग के समीप सड़कों पर हो रहे गड्ढों में भरे पानी में धान के पौधे रोपकर शहर की बदहाल सड़कों को लेकर विरोध जताया। यह कार्यक्रम ब्लॉक कांग्रेस की देखरेख में आयोजित हुआ। ग्वालियर विधानसभा की रोड पर हो रहा है बड़े-बड़े गड्ढों में भरे पानी के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रहीं हैं, जिनके विरोध में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के आव्हान पर आज कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सुनील शर्मा के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय नागरिकों ने रेलवे क्रॉसिंग, मरी माता फूलबाग पर सड़क पर बने गड्ढों में धान के पौधे रोप कर विरोध जताया और शिवराज सरकार से शीघ्र ही सड़कों के निर्माण की मांग की। 
इस अवसर पर मुख्य रूप से ब्लॉक अध्यक्ष अतुल जैन, मुनेंद्र भदौरिया, नवीन, धर्मेंद्र आर्य, माटू यादव, मनीष शर्मा सहित सैकड़ों कांग्रेस जन एवं स्थानीय नागरिक विशेष रूप से उपस्थित रहे। उधर भारतीय युवा कांग्रेस के संसद घेराव में युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीवी श्रीनिवासन के आह्वान पर ग्वालियर युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष हैवरन सिंह कंसाना के नेतृत्व में ग्वालियर जिले से सैकड़ों की संख्या में दिल्ली संसद गिराओ घेराव में प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित मांटू यादव, डबरा विधानसभा अध्यक्ष जीतू राजोैरिया, शिवा तोमर, युवा कांग्रेस ग्वालियर जिला महासचिव संगीता बेटू प्रताप सिंह, आशुतोष शर्मा, युवा कांग्रेस जिला महासचिव जसवंत वर्मा, रजत शर्मा पिंटू गुर्जर, अनमोल द्विवेदी, ग्वालियर दक्षिण विधानसभा उपाध्यक्ष धीरज बाथम, राजेंद्र शर्मा, अभिषेक गोबरेली उपस्थित थे।
 इसलिए बने ऐसे हालात
शहर में गंदे पानी की सप्लाई के पीछे जो सबसे बड़ा कारण है वह यह है कि इन दिनों अमृत योजना के नाम पर शहर में खुदाई जारी है और लोगों को सीवर और पानी की समस्या से बचाने के लिए करोड़ों रुपए इस योजना पर खर्च किए जा रहे हैं, इससे लाभ होने के बजाए दिक्कत ही बढ़ रही हैं। हो यह रहा है कि इस अति महत्वपूर्ण योजना को खुद इंजीनियरों और जानकारों को अपनी निगरानी में काम कराना चाहिए , लेकिन इसे लेबर के हवाले छोड़ दिया जाता है, जिसके चलते वाटर लाइनों में सीवर लाइन जोड़ दी गई हैं, वहीं सीवर लीकेज भी इसका बड़ा कारण है। उधर जिन लोगों पर मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी है, वह भी दफ्तर से बाहर नहीं आते, बल्कि मिलने वाली शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेते। यह लापरवाही निगम को भारी पड़ सकती है।