50 साल में अभी तक की सबसे बड़ी आफत , 98 साल की बुजुर्ग मथुरादेवी बोलीं- मैंने कभी नहीं देखा इतना पानी
Aug 04 2021
ग्वालियर। ग्वालियर-चंबल में बीते 50 साल में अभी तक की यह सबसे बड़ी आपदा है। इससे पहले सन 1971 में इस तरह की बाढ़ आई थी। तब भी पार्वती और सिंध नदी में जल स्तर कई फीट ऊपर आ गया था। भितरवार में रहने वाली 98 साल की मथुरादेवी ने सन 1971 की बाढ़ देखी थी।
उन्होंने बताया कि इस बार जो बाढ़ आई है उसमें इतना पानी तो 50 साल पहले आई आफत में भी नहीं था। ग्वालियर के भितरवार में हर जगह पानी ही पानी दिख रहा है। लोग बचने के लिए दो मंजिल ऊंची छत पर शरण लिए हैं। मैं खुद नगर के घर को छोड़कर पहाड़ी पर बने अपने पुराने घर में आ गई हूं।
यहां बात दें कि भितरवार ग्वालियर का अहम हिस्सा है। यह पार्वती नदी के किनारे बसा है। भितरवार से 5 किलोमीटर दूर पवाया नामक गांव में धूमेश्वर धाम के पास पार्वती नदी और सिंध नदी का मिलन होता है। इसके बाद यह दोनों नदी एक होकर डबरा, दतिया के लिए आगे बढ़ती हैं।
बीते चार दिन में हरसी डैम से पार्वती नदी में कई लाख क्यूसेक पानी अचानक छोड़े जाने से नदी अचानक उफान पर आ गई। इसके साथ ककैटो से पेहसारी और वहां से सिंध नदी में पानी छोड़े जाने सिंध नदी भी उफन गई। ऐसे में यह दोनों नदी के किनारे बसे गांव, नगर में पानी ने भारी तबाही मचाई है। पार्वती नदी में अभी तक 4 लोगों की मौत की खबर है और 25 से ज्यादा लापता हैं। 1600 लोग अभी भी मदद की आस लगाए हुए हैं।
मैंने नहीं देखा कभी इतना पानी
भितरवार के वार्ड नंबर-12 निवासी 98 वर्षीय मथुरादेवी पत्नी स्व. बाबूसिंह यादव ने बताया कि पानी का इतना खौफनाक मंजर उन्होंने कभी नहीं देखा। सन 1971 में बाढ़ आई थी और काफी खतरनाक थी। उस समय भी गांव के गांव खाली करा लिए गए थे, लेकिन नगर में पानी नहीं भरा था। इस बार तो नगर भी जलमग्न हो गया है। आंख उठाकर देखने पर सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है। लोग एक दूसरे की चिंता छोड़कर अपने बारे में सोच रहे हैं। पता नहीं भगवान इन बुढ़ी आंखों को क्या दिखाना चाहता है।
दहशत का ऐसा मंजर पहली बार देखा है
भितरवार निवासी 63 वर्षीय ओंकार सिंह यादव उद्यानिकी विभाग से रिटायर्ड अधिकारी हैं। उन्होंने बताया कि अभी पार्वती नदी में उफान पर आने के बाद भितरवार में जो बाढ़ आई है और दहशत फैली है। ऐसा मंजर इससे पहले उन्होंने कभी नहीं देखा। गांव के गांव डूब गए हैं। लोग 12 से 15 घंटे भूखे प्यासे गांव में बने टापू पर फंसे रहे। इसके बाद भी राहत नहीं पहुंच पा रही है। सन 1971 में भी ऐसी आपदा आई थी। तब मैं 13 साल का था। सब कुछ याद है, लेकिन इस समय कुछ ज्यादा ही खतरनाक हालात हो गए हैं।
भाई साहब ऐसो मंजर कभी नहीं देखा
गांव के 65 वर्षीय कप्तान सिंह और 64 वर्षीय नत्थाराम बाथम भी इसे अभी तक की सबसे खतरनाक स्थिति बताया है। दोनों ने बताया कि वह किसान हैं और बचपन से यहां रह रहे हैं, लेकिन ऐसा मंजर कभी नहीं देखा कि घरों में पानी घुस आया हो। पता नहीं भगवान कौनसी बात पर गुस्सा है कि यह प्रलय आ गई। 50 साल में अभी तक की सबसे बढ़ी बाढ़ हैं।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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