ग्वालियर की महिला हॉकी खिलाडिय़ों का ओलंपिक में कमाल

Aug 02 2021

ग्वालियर। ग्वालियर राज्य महिला हॉकी अकादमी की तीन खिलाडी सहित मध्य प्रदेश की चार खिलाड़ी इस समय टोक्यो ओलंपिक में कमाल दिखा रही हैं। भारत की महिला हॉकी टीम में मध्य प्रदेश की चार खिलाड़ी होना और सभी मिड फील्ड की बेहतरीन खिलाड़ी हैं। इनके अच्छे प्रदर्शन के कारण ही आज भारत ने इतिहास रचते हुए पहली बार किसी भी ओलंपिक के सेमिफाइनल में प्रवेश किया है।
भारतीय महिला हॉकी टीम में शामिल सुशीला चानू, मोनिका व रीना खोकर ग्वालियर राज्य महिला हॉकी अकादमी की हैं, जबकि चौथी खिलाड़ी भोपाल की वंदना कटारिया है। वंदना ही है जिसने सेमिफाइनल से पहले साउथ अफ्रीका के खिलाफ हैट्रिक गोल मारकर भारत की जीत के साथ सेमिफाइनल का रास्ता पक्का किया। ग्वालियर अकादमी की तीनों खिलाड़ी इस समय रेलवे में टीसी की जॉब कर रही हैं। आइए इन खिलाडिय़ों के बारे में राज्य महिला हॉकी अकादमी ग्वालियर के चीफ कोच परमजीत सिंह से जानते हैं कि कैसे उन्होंने इनको तैयार किया है।
वंदना कटारिया
वंदना कटारिया मध्य प्रदेश हॉकी की स्टार खिलाड़ी रही हैं। इनका सीधा संबंध ग्वलियर राज्य महिला हॉकी अकादमी से नहीं है। यह भोपाल अकादमी की हैं। वंदना की बड़ी बहन ग्वालियर अकादमी की खिलाड़ी हैं। परमजीत सिंह का कहना है कि जब एमपी स्टेट के मैच में वंदना से मिलना होता था तो काफी टिप्स दिए हैं। वह अपने खेल को लेकर काफी सजग हैं। तेज तर्रार खिलाड़ी हैं। हमेशा गोल की सोचती है। कई बार वह इस तरह बॉल को पास करती हैं कि आसपास की खिलाड़ी समझ नहीं पातीं। बचपन से ही वह हॉकी में भारत का प्रतिनिधित्व करने को लेकर बात किया करती थी। यही कारण है कि साउथ अफ्रीका के खिलाफ गोल की हैट्रिक करने में सफल रही।
सुचीता चानू
मणिपुर की रहने वाली सुचीता चानू का सिलेक्शन 2006 में राज्य महिला हॉकी अकादमी खुलने के साथ ही यहां हुआ था। 2012 तक वो यहां रहीं। कोच परमजीत सिंह बताते हैं कि जब वह आई थी तो 13 साल की थी। पर खेल को लेकर काफी फोकस थी। मिड फील्ड पॉजीशन पर खेलने का जुनून था। सुबह 6 बजे प्रैक्टिस शुरू होती थी पर वह 5 बजे ग्राउंड पर खड़ी दिखाई देती थी। नियमों का पालन करना और तेज तर्रार हॉकी खेलना ही उसे आता था। कभी किसी दूसरी ओर उसका ध्यान ही नहीं गया। बचपन से ही उसने सपना देखा था कि हॉकी में उसका नाम हो।
मोनिका
हरियाणा निवासी मोनिका यह राज्य महिला हॉकी अकादमी ग्वालियर में 2010 से 2012 तक रही हैं। साधारण परिवार है और घर में किसी ने कभी हॉकी तक नहीं पकड़ी है। इनके कोच बताते हैं कि मोनिका ऊपर से जितनी शांत दिखती हैं उससे कहीं ज्यादा खेल में एग्रेसिव हैं। वह भी मिल फील्ड पर खेलती हैं। उनके एग्रेसिव खेल के चलते ही अकादमी के कई मैच में सबसे ज्यादा येलो और रेड कार्ड उनको ही दिखाए जाते थे। खेल को लेकर वह भी शुरू से काफी गंभीर हैं। मोनिका कहती थी सर देखना एक दिन हम इंटरनेशनल लेबल पर नाम करेंगे। अब उसकी बातें याद आती हैं।
रीना खोकर
पंजाब की खिलाड़ी रीना खोकर भी एक मध्यम वर्गीय परिवार से हैं। साल 2010 से लेकर 2018 तक यह राज्य महिला हॉकी अकादमी ग्वालियर की सदस्य रही हैं। रीना के बारे में चीफ कोच परमजीत सिंह बता रहे हैं कि यह मिड फील्ड पॉजीशन पर खेलती हैं। समय को लेकर पाबंद हैं। अकादमी में सबसे नियम वाली खिलाड़ी थी। खेल को लेकर जुनून था। जब यह खेलती है तो दूसरी टीम के 10 खिलाडिय़ों पर भारी पड़ जाती है। मिड फील्ड पर खेलते-खेलते कब फॉरवर्ड पहुंचकर गोल कर आती है पता भी नहीं चलता। कोच ने एक एलएनआईपीई में मैच का किस्सा भी बताया। जब टीम की तरफ से सारे गोल रीना ने ही किए। बाद में दूसरी टीम कहती है पता ही नहीं चलता यह मिड फील्ड पर खेलती है या फॉरवर्ड पर।
सीएम ने ट्वीट कर दी बधाई
भारत की महिला हॉकी टीम के सेमिफाइनल में प्रवेश करने के बाद मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह ने ट्वीट कर मध्य प्रदेश की चारों खिलाडिय़ों को बधाई दी है। साथ ही लिखा है कि यह शेयर करते हुए काफी खुशी हो रही है कि टोक्यों में नाम करने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम में 4 खिलाड़ी मध्य प्रदेश महिला हॉकी अकादमी की हैं। इसके लिए खेल मंत्री यशोधरा राजे और निर्देशक पवन जैन को बधाई की उन्होंने इन खिलाडिय़ों को तैयार किया।