दिल के रिश्तों और विश्वास से बढ़ती है मित्रता-अखिलेश अर्गल

Jul 31 2021

ग्वालियर। राज्य आनंद संस्थान म. प्र. के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अखिलेश अर्गल द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस के अवसर पर जिला ग्वालियर के आनन्दको द्वारा आयोजित ऑनलाइन आनन्द संध्या में अपने उदबोधन में कहा कि इस दिवस का आयोजन विभिन्न देशों, संस्कृति और समुदायों के बीच परस्पर सहयोग से मित्रता के सम्बन्धो को मजबूत बनाने हेतु किया जाता है। अर्गल ने आनन्दको से कहा कि हमारे जीवन में गहरी मित्रता वहाँ होती है, जहाँ दिल से यह विश्वास का रिश्ता बनता हैं। प्रेम, समर्पण, आपसी समझ, सहयोग और नि:स्वार्थता के भाव से मित्रता में प्रगाढ़ता आती है। हमें आनन्दपूर्ण जीवन के लिए स्वयं से लेकर परिवार औऱ समाज तक मित्रतापूर्ण व्यवहार को बढ़ावा देना चाहिए।
डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम लीडर (आनन्द) विजय कुमार उपमन्यु ने आनन्द संध्या की रूपरेखा और मित्रता दिवस की भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के प्रारंभ में सरिता शर्मा ने गायत्री मंत्र एवं वन्दना गायीं। डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि संकट के समय हमारे मित्र ही साथ खड़े होते हैं, उन्होंने कोविड के समय अपने मित्रों द्वारा दिये सहयोग के लिए कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम के संचालन में सहयोगी सीता पवन चौहान ने "अपरिभाषित मित्रता" पर अपनी रचना पढ़ी। डॉ. ज्योत्सना राजावत ने अपनी रचना में बताया कि पाकर नजर से इशारा, दिल तक पहुंच जाए, बिन कहे जीवन को खूबसूरत बनाये, वही मित्र कहलाये। भारती शाक्य ने मित्रता इसी का नाम है पर अपनी रचना पढ़ी और तेरे जैसा यार कहाँ गीत गाया। पुष्पा मिश्रा ने रामायण और महाभारत काल की दोस्ती का उल्लेख करते हुये अपनी रचना पढ़ी। पूजा गुप्ता ने मित्रता जीना सिखाया पर प्रसंग रखा। डॉ. मिथलेश बघेल ने नारी की मित्रता के आयामों को अपनी रचना से अभिव्यक्त किया। तृप्ति शर्मा ने कहा कि मित्रता का कोई विकल्प नहीं होता और इसमें उम्र की कोई सीमा नहीं होती। संचालन में सहयोगी प्रतिभा दुबे ने अपनी रचना में बताया मन से मन मिलता है और दिल खिल जाते है, वे प्यार भरे रिश्ते मित्रता कहलाते है। सुजात यदुवंशी ने राधा-कृष्ण मित्रता का भजन सुनाया औऱ आशा त्रिपाठी ने कृष्ण-सुदामा मित्रता प्रसंग बताया। अम्रता गुप्ता ने जीवन की गुत्थी में मित्र बहुत याद आते है रचना पढ़ी। मधु शर्मा ने बताया कि दोस्ती ऐसी हो जिसमें "मैं" की भावना ना हो। डॉ. विपेन्द्र सिंह ने मित्रता के संबंधों से मानसिक शान्ति और आनन्द प्राप्ति का उल्लेख किया। डॉ. निशी भदौरिया, दीप्ति दीप ने भी काव्य रचना पढ़ी। कार्यकम में दीप्ति उपाध्याय, हेमन्त निगम, डॉ. अतुल रायजादा, नीलम सक्सेना, सुनील रॉय, नरोत्तम शर्मा, हेमंत गुप्ता सहित करीब 50 आनंदक जुड़े। सभी ने अपने मित्रों को याद करते हुये अच्छी मित्रता का संकल्प लिया। सभी का विजय कुमार उपमन्यु द्वारा आभार व्यक्त किया गया।