निगम लेखापाल का खेल , लोकायुक्त की नगर निगम मुरैना में तैनात लेखापाल के घर पर रेड
Jul 21 2021
मुरैना/ग्वालियर। सरकारी भुगतान करने में लेखापाल की क्या भूमिका होती है? यह किसी से छिपी नहीं है। सिर्फ बिल और चेक पर चिडिय़ा (दस्तखत) बैठाने के लिए अपना हिस्सा लेने वाले यह लेखापाल ऐसा खेल खेलते हैं कि देखते ही देखते करोड़ों में खेलने लगते हैं। ऐसे ही एक लेखापाल की आज बुधवार की सुबह लोकायुक्त पुलिस ग्वालियर ने घंटी बजा दी। इसके बाद जैसे-जैसे पड़ताल आगे बढ़ती गई, लेखापाल का खेल सामने आने लगा और जहां लोकायुक्त पुलिस की टीम ने हाथ डाला, वहां लेखापाल की अवैध कमाई का निवेश मिला। छापे एक साथ चार स्थानों पर मारे गए। इसमें तीन ठिकाने मुरैना और एक ठिकाना ग्वालियर में है।
38 साल में हो गया मालामाल
संतोष शर्मा की कुल नौकरी 38 साल की है। इतनी लंबी नौकरी में उसे जितना वेतन मिला और उसके पास जितना माल मिला, वह उसके वेतन से कतई मेल नहीं खा रहा है। उसके पास मकान भी कई हैं और खेती योग्य कीमती जमीन भी। वाहन की भी एक एजेंसी उसने ले रखी है। बैंक खाते भी एक नहीं कई हैं और घर में पांच-पांच सौ की गड्डियां भी खूब मिली हैं। सोने के जेवर तोलने के लिए सुनार बुलाना पड़ा।
सहायक ग्रेड तीन से भर्ती
लोकायुक्त पुलिस ने आज नगर निगम मुरैना में पदस्थ लेखापाल संतोष शर्मा के ठिकानों पर छापे मारे। संतोष शर्मा जब 1983 में सरकारी नौकरी में आया तब उसकी भर्ती सहायक ग्रेड तीन के पद पर हुई थी और पे स्केल था 450- 750। इसके बाद वह अफसरों की कृपा से देखते ही देखते प्रमोशन की देहरी पार करता गया। वेतन तो उसे सरकार देती ही थी, इसके अलावा वह हर सरकारी भुगतान में अपना हिस्सा भी समेटने लगा। आज की तारीख में उसका कुल वेतन 1 लाख 20 हजार रुपए है और कट-पिटकर उसके हाथ में 1 लाख 2 हजार रुपए प्रति माह आते हैं।
कमीशन पर ऐश
वेतन बैंक में जमा ले खापाल संतोष शर्मा के मुरैना स्थित घर के दस्तावेज जब डीएसपी प्रद्युम्न पाराशार के नेतृत्व वाली टीम ने खंगाले तो पता चला कि चार बैंक खातों में 47 लाख 50 हजार रुपए जमा मिले। सरकारी सेवक की सैलरी बैंक खाते में आती है और बैंक खातों में जमा रकम इशारा कर रही है कि यह सैलरी खाते में जमा रखता था और बतौर कमीशन मिलने वाली रकम से मौज करता था। घर में आठ लाख नकद मिले तो बीस तौला वजनी सोने के जेवर मिले हैं।
सैलरी और खर्चे में मेल नहीं: एसपी
एसपी लोकायुक्त संजीव सिंह ने कहा, लेखापाल संतोष शर्मा की सैलरी और खर्चे में कोई मेल ही नजर नहीं आ रहा है। बैंक खातों में करीब आधा करोड़ जमा हैं। आठ लाख तो घर में नकद मिले। ट्रैक्टर की एक एजेंसी भी परिवार के नाम है। दुकान भी है। कई मकान भी हैं। खेती के काबिल महंगी जमीन भी है। 15 साल से तो यह मुरैना नगर निगम में ही तैनात है। मकान मुरैना और ग्वालियर में हैं। बैंक लॉकर अभी टटोले नहीं हैं।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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