त्याग धर्म है मनुष्य को त्याग की साधना करनी चाहिए-मुनिश्री

Jul 09 2021

ग्वालियर। त्याग में धर्म है, जितना त्याग है उतना धर्म व संयम है। इसलिए मनुष्य को त्याग की साधना करनी चाहिए। त्याग से कर्मों की निर्जरा होती है और कर्मों की निर्जरा से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है। अपने भावों को शुद्ध करना भी त्याग धर्म है। हमें अपने जीवन में त्याग धर्म को अपनाना चाहिए। यह विचार राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने शुक्रवार को बड़े गांव से पदा विहार कर ठाठीपुर गायत्री नगर पहुँचकर आशीष वचन दिए।
मुनिश्री ने कहा कि पहले अपनी दृष्टि बदलो। क्योंकि जैसी आपकी दृष्टि रहेगी, वैसी ही आपकी सोच होगी और यदि सोच अच्छी रहेगी तो आपकी सृष्टि भी बदल जाएगी। यह सांसारिक जीवन एक रंगमंच है। हर व्यक्ति को अपने और बेटे की चिंता है। यहां तक कि वो आने वाली अगली पीढी़ की भी चिंता कर रहा है। ऐसे लोग खाते तो भारत देश में हैं, लेकिन खाता खुलाते विदेश में है। इस मौके पर विकास सोनू जैन, राजेश लाला, अनिल दीपिका जैन, विपुल जैन, नीरज जैन, रवि जैन. धमेंद्र जैन, जितेंद जैन, अजय जैन, विजय जैन, पारस जैन, राजीव जैन, आदि ने मुनिसंघ के चरणों मे श्रीफल भेंटकर आर्शीवाद लिया।
सिंधिया संतो की सेवाभक्ति के पुण्य योग्य मंत्री बने
मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने कहा कि श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पहली बार फूलबाग मैदान में आयोजित पंच कल्याणक में पहुँचकर दिगंबर जैन संतो के चरणों का अभिषेक व पूजन कर आर्शीवाद लिया था। जैन संतो के पास उनके पिताश्री स्व माधवराव सिंधिया परिवार के साथ दर्शनों के लिए आते थे। वही संस्कारों की परंपरा उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया निभा रहे हैं। आज पूरे ग्वालियर संभाग में सिंधिया को केंद्रीय मंत्री बनने की खुशी की लहर है। सिंधिया परिवार पर मेरा मंगल आशीर्वाद है और आगे भी हमेशा बने रहेगा।
मुनिसंघ से लिया पूर्व विधयाक ने आशीर्वाद, ठाठीपुर में आहारचार्य हुई
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ससंघ ने शुक्रवार को गुरुभक्तों के साथ ढोल तासो के संग बड़े गांव से ठाठीपुर के लिए मंगल पद विहार किया। मुनिसंघ के मुरार पहुचाने पर पूर्व विधायक मुन्नालाला गोयल ने मुनिराजों से आशीर्वाद लिया। मुनिसंघ दीनानाथ जैन मंदिर विराजे भगवान आदिनाथ की प्राचीन प्रतिमा के दर्शन किए। मुनिसंघ ठाठीपुर सोनू जैन के निवास पर आहारचर्या संपन्न हुई।