धर्म के मार्ग पर चलने की सीख देते हैं संत-आर्यिकाश्री

Jul 06 2021

ग्वालियर। भारतीय संस्कृति में माता-पिता की आज्ञा के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने के कई उदाहरण है। माता-पिता अपने बुजुर्गों की सेवा कर नई पीढ़ी में संस्कार दें। मंदिर तो बहुत हो गए लेकिन मंदिर में पुजारियों को लाना है। संत ही युवा पीढ़ी को सद्मार्ग और संस्कारवान बनाते हैं। समाज में बदलाव की शुरुआत हर आदमी को अपने घर से करना होगी। यह विचार आर्यिका रत्नश्री आर्षमती माताजी ने मंगलवार को सिथौली स्थित चाणक्य कॉलेज में पदाविहार के दौरान आर्शीवचन में व्यक्त किए।
 आर्यिकाश्री ने आगे कहा कि युवा पीढ़ी माता-पिता की बातों पर ध्यान नहीं देती हैं। बच्चों को संस्कारी बनाने के लिए माता-पिता को खुद आदर्श बनना होगा। उन्होंने माता पिता की आज्ञा मानने के मामले में भगवान श्रीराम के उदाहरण को सामने रखा। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाना चाहिए।
सोनागिर से पद विहार कर ग्वालियर चाणक्य कॉलेज पहुंची
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री ज्ञानसागर महाराज की अंतिम शिष्या गुरुमाँ आर्यिका रत्नश्री आर्षमती माताजी सोनागिर से पद विहार कर मुरैना चातुर्मास के लिए विहार चल रहा है। मंगलवार को आर्यिकाश्री ग्वालियर सिथौली स्थित चाणक्य कॉलेज पहुँची, जहाँ समाजजनो  ने उनके पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी। आर्यिकाश्री की आहारचार्य संपन्न कराई गई।