6 साल से पुलिस के रिकॉर्ड में था लापता, सड़कों पर लूट रहा था मोबाइल

Jul 05 2021

ग्वालियर। एक गुमशुदा की कहानी चर्चा में है। 18 साल का लड़का अक्टूबर 2015 में अचानक गायब हो गया। बड़े भाई ने हजीरा थाना में गुमशुदगी दर्ज कराई। उसकी तलाश करते-करते 5 जांच अधिकारी बदल गए, पर कोई उसे नहीं ढूंढ़ा सका। अब जाकर वह हजीरा पुलिस के हाथ लगा है। उसकी उम्र अब 24 साल हो गई है।
पुलिस के रिकॉर्ड में वह जरूर 6 साल तक गुम रहा, लेकिन शहर में वह ताबड़तोड़ लूट की वारदात कर रहा था। 2015 में सिटी सेंटर में छात्रा से मोबाइल लूट और 2017 में कोतवाली में मोबाइल लूटा। 2017 में वह पकड़ा भी गया था। जेल भी भेजा गया, लेकिन हजीरा पुलिस को पता ही नहीं चला। पुलिस उसे गुमशुदा मानकर ढूंढ़ती रही। कुछ महीनों के बाद वह जेल से छूटा और फरार हो गया। उसने भोपाल, जयपुर में भी वारदात की हैं। जिस पुलिसकर्मी ने उसे 4 साल पहले पकड़ा था। वह बदली होकर हजीरा पहुंचे। जब इस गुमशुदा की फाइल उनके पास आई तो माथा ठनका। इसे तो पहले पकड़ चुके हैं। उसी पुलिसकर्मी ने रविवार को फिर उसे पकड़ा और कोर्ट में पेश किया। अब जाकर गुमशुदा की फाइल बंद हुई है।
यह है पूरा मामला, ऐसे पकड़ा गया
हजीरा थाना में 28 अक्टूबर 2015 को राहुल बाथम (18) पुत्र स्व. शिवबहादुर बाथम निवासी लूटपुरा की गुमशुदगी दर्ज की गई थी। परिजन ने बताया था कि वह बिना बताए कहीं चला गया है। पुलिस ने भी लापता राहुल की तलाश शुरू की। उस समय मामले की जांच प्रधान आरक्षक हरि सिंह के पास थी। उन्होंने अपने स्तर पर उसकी तलाश की, लेकिन वह नहीं मिला। इसके बाद गुमशुदगी की जांच एएसआई वीरेन्द्र छारी को मिली, उन्होंने भी प्रयास किया, लेकिन लापता राहुल का कुछ पता नहीं चला।
इस मामले की जांच 2019 में पीएसआई अंकित मुकाती के पास आई पर वह भी इसे तलाशने में नाकाम रहे। उनके बाद 2020 में जांच प्रधान आरक्षक विश्वनाथ सिंह पर रही। पर उनको भी गुमशुदा नहीं मिला। 2021 में गुमशुदगी की जांच हजीरा थाना के एएसआई शैलेन्द्र सिंह चौहान को मिली। जब गुमशुदा की फाइल को वह पढ़ रहे थे तो उनका माथा ठनका। उनको लगा कि इस लड़के को तो वह 2017 में कोतवाली थाने में थे तब मोबाइल लूट में पकड़ चुके हैं। उसे जेल भी भेजा था, पर उसके बाद से वह फरार था, जबकि यहां वह 6 साल से गुमशुदा है।
इस पर एएसआई शैलेन्द्र ने सीएसपी महाराजपुरा रवि भदौरिया, टीआई हजीरा आलोक सिंह परिहार को सूचना दी। इसके बाद उसकी फिल्डिंग लगाई। रविवार को उसकी सूचना मिली, जिस पर एएसआई शैलेन्द्र, प्रधान आरक्षक विनोद तोमर आरक्षक विकास लोधी, अर्जुन, राहुल राजावत व जनक सिंह ने घेराबंदी कर राहुल बाथम को बरामद किया।
गुमशुदा बन गया लुटेरा, भोपाल, जयपुर में की वारदातें
गुमशुदा राहुल लापता होने के बाद गलत संगत में आ गया और वह स्मैकची बन गया। उसके बाद 2015 में विश्वविद्यालय क्षेत्र में नेहा नाम की छात्रा से मोबाइल लूटा। वर्ष 2017 में कोतवाली क्षेत्र में मोबाइल लूटा। लूटे गए मोबाइल को ऑन करते ही वह पकड़ा गया। उस समय भी वहां उसे ्रस्ढ्ढ शैलेन्द्र सिंह ने ही पकड़ा था। इसके बाद उसे जेल हो गई और छूटने के बाद वह कोर्ट की तारीख जंप कर गया। पुलिस से बचने के लिए लगातार एड्रेस बदलता रहा। लूटपुरा के बाद इंदिरा नगर थाटीपुर में रहा, फिर गुकृपा नगर डीडी नगर में रहा। भीम नगर में भी कुछ समय के लिए रूका। इसके बाद भोपाल, जयपुर में भी अपने रिश्तेदारों के पास रहा और वहां स्टेशन पर जेबकटी की वारदातों को अंजाम दिया।
कहता है पेपर में छपता था तो हंसी आती थी
पकड़ा गया गुमशुदा अब 18 से 24 का हो गया है। उसका कहना है कि जब भी उसकी गुमशुदगी की खबर पेपर (अखबार) में देखता था तो हंसी आती थी। पुलिस के सामने से रोज निकलता हूं, वारदात करता हूं। पकड़ा जा चुका हूं और जेल भी जा चुका हूं। उसके बाद भी पुलिस मुझे गुमशुदा समझ रही है। उधर टीआई हजीरा आलोक सिंह परिहार ने बताया कि हमारे यहां जिसकी गुमशुदगी की थी उसके नाम स्थायी वारंट था। उसे पकड़ा गया है और कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।