सिद्धांशु भारद्वाज की कलम से आज के युग में सबसे आसान नेता बनना *नए नए नेता सफेद कुकुरमुत्तों की तरह पैदा हो रहे है
Jun 19 2021
हम सभी सही या ग़लत तरीके से प्रेरित है ।आजकल देखा जा रहा है हर महीने,हर साल नए-नए नेता दिखाई दे रहे है, जरा उनसे कोई ये तो पूछे कि आपने अभी तक किसी पार्टी की सदस्यता ली है ? आपने कितनी जन जाग्रति करी अपने संगठन के लिए ? आपका समाज के प्रति, संगठन के प्रति कितनी त्याग, तपस्या ,सेवा रही ? आपने राजनीति किस उद्देश्य से चुनी ? आपकी शैक्षणिक योग्यता क्या है ?आपका व्यापार क्या है ? आपने पार्टी के मूल्य ,सिद्धांत, विचारो पर कभी किसी वरिष्ठ से बौद्धिक शिक्षा ली है या सिर्फ अपने 20,30 लोगो के साथ बड़े-बड़े चार पहिए वाहन लेकर, कलफ लगा कुर्ता पजामा पहनकर ,शहर में किसी मंत्री जी के साथ फोटो होर्डिंग लगाकर ,किसी मंत्री जी के पीछे लग गए अपने गलत व्यापार को ओर अपने कुकर्मों को बचाने के उद्देश्य से ये बहुत ही चिंतन का विषय है ,इस बारे में सभी वरिष्ठ नेताओं को सोचना चाहिए कि उनके इर्द गिर्द कैसे लोग चल रहे है, आप समाज के पड़े लिखे अच्छे युवाओं को क्या संदेश ओर प्रेरणा देना चाहते है, भविष्य में आप अपने मोहल्ले, शहर, प्रदेश, देश को कैसा नेतृत्व देना चाहते है ,इस पर जरूर गौर करना चाहिए उन सभी को जो उच्च दायित्व पर बैठे है , क्योंकि वह कुकुरमुत्ते समाज सेवा की भावना से आपके साथ नहीं जुड़े ,ना ही उन्हें ज्यादा आपके संगठन से मतलब है ,वो तो सिर्फ निजी स्वार्थ के लिए आपके समक्ष है ,उन्हें तो केवल अपने गलत धंधे ओर कामो के लिए आपका आसरा चाहिए ये दल बदलू गिरगिट से भी तेज रंग बदलते है ,आज कोई ,कल कोई ,उन्हें सिर्फ आपसे प्रशासनिक मदद ओर अपने गलत कामों के लिए आपका सहारा चाहिए संगठन ओर नेतृत्व को चाहिए कि वह प्राथमिक पाठशाला की तरह से भर्ती करे उनको विचार ओर सिद्धांतो की राजनीति का पाठ पढ़ाए ओर उनके व्यक्तिगत जीवन को निखारे,सेवा भाव पैदा करे एवम वरिष्टता ओर कनिष्ट्टता के मापदंड से अवगत कराए ,तभी प्रतेक दल को नीखरा हुए कार्यकर्ता मिलेगा ऐसा माना जाता था कि या तो जनसंघ ओर भारतीय जनता पार्टी के पास बूथ स्तर से लेकर राष्ट्र स्तर तक संगठन रहा है , ओर या फिर कम्युनिस्ट पार्टी के पास ऐसा ही संगठन रहा है ,जो आज कहीं देखने को नहीं मिलता ,जिसे दोनों पार्टियां मूलतः खोती जा रही है, इसी कारण विचारो ओर सिद्धांतो का हास ( गिरावट) देखने को मिल रही हैअंत में मेरा यह सुझाव है कि किसी भी दल के नेतृत्व को इन खूबियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए चरित्र, प्रतिबद्धता, द्रंढ विश्वास, तहजीब ,साहस ,निष्ठा, विश्वसनीयता ,स्थिरतासंगठन की पहली जिम्मेदारी ज्ञान देना ओर चरित्र निर्माण होता है, न कि सीधे पदोन्नती से नवाजना
सिद्धांशु भारद्वाज
संपादक
Rajesh Jaiswal
9425401405
rajeshgwl9@gmail.com
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