21 फुट ऊंची भगवान शांतिनाथ का सतरंगी महा मस्तकभिषेक किया, चढ़ाया निर्वाण लड्डू

Jun 09 2021

ग्वालियर। श्री दिगम्बर जैन बीसपंथी बडा मंदिर प्रबंधक कमेटी ग्वालियर के तत्वाधान में गेंडेवली सड़क स्थित दिगबर जैन नसिया मंदिर में बुधवार को राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज एवं मुनिश्री विजयेश सागर महाराज के सानिध्य श्रद्धालुओ ने शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप व मोक्ष कल्याणक पर सोशल डिस्टेसिग के साथ पंचाअमृत से महामस्तकभिषेक व निर्वाण लड्डू समर्पित किया।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि 21 फुट की विशाल प्रतिमा शांतिनाथ भगवान का पंचअमृत से इंद्रों नें पीले वस्त्र धारण कर महा मस्तकभिषेक किया। मुनिश्री विहर्ष सागर के श्रीमुख से वृहद से मंत्रउच्चरण के साथ विश्व में फैली कोरोना महामारी से शीघ्र ही मुक्ति के लिए शांतिधार डॉ वीरेंद्र गंगवाल, प्रशांत गंगवाल विकास गंगवाल ने की। जैसे ही भगवान का महामस्तकभिषेक हुआ तो मोजूद उपस्थित जैन समाज के लोगो जयकारों के साथ गॅूज उठा। भगवान शांतिनाथ की अष्टद्रव्य से पूजा आर्चन के साथ निर्वाण कांड बोलकर भगवान शांतिनाथ को अनिल जैन दीपिका जैन परिवार ने 11 किलो का निर्वाण लाडू भी चढ़ाया गया। मुनिश्री के चरणों में समिति के अध्यक्ष डॉ वीरेंद्र गंगवाल, प्रशांत गंगवाल, विकास गंगवाल, अजित कासलीवाल, विनय कासलीवाल, संजय गोधा, बंसत गोधा, शरद बोहरा, आदि ने श्रीफल चढ़ाकर आशीर्वाद लिया।
 जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि श्रध्दालुओं ने भगवान शांतिनाथ का महामस्तकभिषेक सुगंधित जल, दही, केशर, नरियल पानी, फल के रस, दुध, सर्वऔषाधि, कुमकुम, अनार, पाईनपाल़, घी, प्रतिमा पर चन्दन लेपनÓ एवं गुलाब पुष्पों की वृष्टि के साथ अभिषेक किया।
धर्म में तीर्थंकर भगवान के कल्याणक का विशेष महत्व है-मुनिश्री
 मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने आशीष वचन देते हुए कहा कि जैन धर्म में तीर्थंकर भगवान के जन्म तप और मोक्ष कल्याणक का विशेष महत्व है। भगवान के यह कल्याणक मुक्तिपथ की प्रेरणा देते हैं। यह आयोजन मानव से महामानव और आत्मा से परमात्मा बनने के प्रतीकात्मक आयोजन है। जिनके जरिए धर्म और पुण्य का संचय होता है। भगवान शांतिनाथ ने चक्रवर्ती सम्राट होने के बावजूद सब कुछ त्याग कर आत्म कल्याण के मार्ग को अपनाया था। जिसके जरिए उन्होंने मोक्ष को प्राप्त कर जगत को मोह माया राग द्वेष से दूर रहने का संदेश दिया।