नारदजी जैसे समाज एवं लोकहित में काम करने वाले पत्रकारों की आवश्यकता-नारद जयंती समारोह एवं ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन

May 30 2021


ग्वालियर, न.सं.। वरिष्ठ साहित्यकार एवं स्तम्भकार प्रहलाद सबनानी जी ने आद्य पत्रकार देवर्षि नारद के पत्रकारिता जीवन पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारी संस्कृति में जो स्थान भगवान गणेश का है वहीं स्थान पत्रकारिता के क्षेत्र में देवऋषि नारद जी का है। जिसका मुख्य कारण भगवान के मन की बात को बिना कहे समझ लेना और उसे सरलता से दूसरों तक पहुंचाना। वे अपनी बात  हर किसी के सामने इस तरह रखते थे कि वे उनकी सलाह को मना नहीं कर पाता था। उनकी पत्रकारिता समाज के हित में थी, जिसके कारण देवताओं से लेकर दैत्य तक उनका सम्मान करते थे। उन्हें उपनिषदों का मर्मज्ञ कहा जाता है, जिसका अर्थ है रहस्यों को जानने वाला। वे भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालों के ज्ञाता थे। वे सत्य, न्याय और लोकहित को सदैव आगे रखते थे श्रीसबनानीमामा.माणिकचन्द वाजपेयी स्मृति सेवा न्यास द्वारा आद्य पत्रकार देवर्षि नारद जयंती समारोह एवं व्याख्यान में बतौर मुख्य वक्ता के रूप में उद्बोधन दे रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता न्यास के अध्यक्ष दीपक सचेती जी ने की 'कोरोना काल में भीषण चुनौतियां एवं समाधानÓ विषय पर ऑनलाइन आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा की आज के समय में भी हमें नारद जी जैसे ही लोकहित और समाज के हित में काम करने वाले पत्रकारों की आवश्यकता है।  पत्रकारिता में जाति, कुल, विद्या, रूप का भेदभाव किए बिना समाज के कल्याण की भावना होनी चाहिए। मुख्य वक्ता श्री सबनानी जी ने कोरोना काल में भीषण चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कोरोना संकट की पहली और दूसरी लहर में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए। कई परिवारों ने अपने स्वजनों को खोया, वहीं कई परिवारों को अपनों के इलाज के लिए भारी ऋण लेना पड़ा, जिसके कारण वे कर्ज के बोझ तले दब गए। महामारी के काल में आर्थिक गतिविधियां रुकने, नौकरी और व्यापार में नुकसान के कारण लोग अवसाद ग्रस्त हो गए। वहीं कई बच्चों ने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया। लाखों बच्चे आज अनाथ हो गए।  ऐसे सभी बच्चों को हमें अपनत्व प्रदान करना चाहिए। साथ ही उनके लालन-पालन की भी व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महामारी की दूसरी लहर में एक समय ऐसा आया जब ऑक्सीजन, रेमडेसिविर दवा, वेंटीलेटर, बिस्तर की कमी सामने आई है। सरकार के साथ-साथ सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक संस्थाओं ने मदद पहुंचाई। दूसरी ओर महामारी पर नियंत्रण पाने के लिए दोनों लहरों के दौरान लगाए गए लॉकडाउन की वजह से आर्थिक गतिविधियां रुक गईं। जिससे कई लोगों ने अपनी नौकरियां खो दी, वहीं छोटे व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। ऐसे व्यापारियों की सहायता के लिए आवश्यक है कि हम मॉल कल्चर छोड़ें और छोटी दुकानों और व्यापारियों से सामान खरीदें, ताकि वे आर्थिक रूप से दोबारा सबल हो सकें। समारोह के आखिरी में वरिष्ठ पत्रकार बृजमोहन शर्मा ने कोरोना काल में दिवंगत हुए ग्वालियर के पत्रकार राजेश श्रीवास्तव, आकाश सक्सेना, देवकीनंदन शर्मा, रतिराम शाक्य के पुण्य स्मरण सुनाते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्य वक्ता का स्वागत चित्र भारती के प्रांत सह संयोजक दिनेश चाकणकर, विभाग प्रचार प्रमुख निशांत शर्मा, अंबरीश भदौरिया एवं राजलखन सिंह ने किया। संचालन मप्र सिंधी साहित्य परिषद अकादमी के निदेशक राजेश वाधवानी एवं आभार कार्यक्रम संयोजक नवीन सविता ने व्यक्त किया। गीत दीपक सोनी ने गाया। ऑनलाइन कार्यक्रम में बड़ी में स्तम्भकार, वरिष्ठजन एवं पत्रकार आदि शामिल हुएसमाज के सभी वर्ग एक साथ मिलकर आगे आएं मुख्य वक्ता प्रहलाद सबनानी ने कोरोना महामारी से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान बताते हुए कहा की सकरात्मक विचारों से महामारी की नकरात्मकता को खत्म किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि समाज के सभी वर्ग एक साथ मिलकर साथ आएं और इसके लिए कार्य करें। उन्होंने कहा की विश्व के अन्य देशों की तुलना में भारत में महामारी के प्रसार की तुलना करें तो हम कई गुना बेहतर स्थिति में खुद को पाते हैं। जिसका मुख्य कारण है कि हम भगवान की कृपा कहकर खुद को सकारात्मक बनाए रखते हैं। इसके आलावा हमारी संस्कृति में शामिल संकल्प की दृढ़ता, सतत् प्रयास, योग, ध्यान, व्यायाम, आयुर्वेदिक उपचार ने हमें बचाए रखा है