अंगूरी कहती हैं सरकार की योजना ने हमें कोरोना संकट से उबार दिया

May 28 2021

 
ग्वालियर 28 मई  वैश्विक महामारी कोरोना ने लोगों को बहुत दर्द दिया है। किसी की रोजी-रोटी छिनी तो किसी ने अपनों को खो दिया। इस घोर संकट के बीच प्रदेश सरकार द्वारा संचालित योजनाओं ने कोरोना से प्रभावित लोगों को बड़ा संबल दिया है। अंगूरी देवी उन्हीं में से एक हैं, जिनके बेटों को संकट की घड़ी में सरकार की योजना से गांव में ही आजीविका मिली हैग्वालियर जिले के विकासखण्ड मुरार के ग्राम टिहौली निवासी श्रीमती अंगूरी देवी के बेटे रामनिवास व धर्मेन्द्र पंजाब राज्य के पठान कोट में धंधा-पानी करने गए थे। परिवार का गुजारा आराम से चल रहा था। इसी बीच पिछले साल पंजाब के साथ पूरे देश में कोरोना ने पाँव पसारे। सरकार को कोरोना संक्रमण की चैन तोड़ने के लिये मजबूरन कोरोना कर्फ्यू और लॉकडाउन जैसे कदम उठाने पड़े। लॉकडाउन के दौरान रामनिवास व धर्मेन्द्र की रोजी-रोटी जाती रहीलॉकडाउन लगा तो रामनिवास व धर्मेन्द्र अपने गाँव टिहौली लौट आए। कुछ दिन तो जमा पूंजी से काम चल गया। लेकिन इसके बाद दो जून की रोटी भी मुश्किल हो गई। ऐसे में श्रीमती अंगूरी देवी द्वारा कुछ वर्षों पूर्व दिखाई गई समझदारी काम आई। अंगूरी राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गाँव में बने रतनगढ़ वाली माता स्व-सहायता समूह से जुड़ गई थीं। जब कहीं आसरा नहीं दिखा तो अंगूरी ने अपने समूह की बैठक में ऋण की गुहार लगाई। सर्व सम्मति से अंगूरी को 5 हजार रूपए का ऋण मिल गया, जिससे उन्होंने अपने बेटों के लिए सब्जी की दुकान खुलवा दीदुकान चली तो रामनिवास और धर्मेन्द्र के हौसले भी बढ़ गए। उन्होंने मुख्यमंत्री ग्रामीण पथ विक्रेता योजना से मदद लेने के लिये ऑनलाइन फार्म भर दिया। जल्द ही उटीला स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा से उन्हें 10 हजार रूपए की आर्थिक मदद मिल गई। इससे उन्होंने अपनी दुकान को और ऊँचाईयां प्रदान की। आमदनी बढ़ी तो दोनों भाईयों ने अलग-अलग दुकानें खोल लीं। अंगूरी देवी बताती हैं कि सब्जी के इस छोटे से कारोबार से उन्हें हर माह 10 से 12 हजार रूपए की आमदनी हो जाती है। वे कहती हैं उनके बेटों ने 4 हजार रूपए की ऋण वापसी भी कर दी है। अंगूरी का कहना है कि संकट के समय मुख्यमंत्री ग्रामीण पथ विक्रेता योजना ने हमारे परिवार को आत्मनिर्भर बना दिया है