आईसीयू अटेंडर 20 हजार रु. में कोविड पेशेंट को बेच रहे थे प्लाज्मा थाना प्रभारी ने कस्टमर बन कर की डील, दो गिरफ्तार

Apr 28 2021

ग्वालियर। ग्वालियर में अब रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ प्लाज्मा की कालाबाजारी होने लगी है। ग्वालियर के सबसे बड़े अस्पताल जयारोग्य के वार्ड बॉय, आईसीयू अटेंडर एक ऑटो चालक एजेंट के साथ मिलकर प्लाज्मा बेच रहे थे। थाना प्रभारी झांसी रोड मिर्जा आसिफ बेग ने खुद को कोविड पेशेंट का परिजन बताकर एजेंट को जाल में फंसाया। एक बैग प्लाज्मा 20 हजार रुपए में खरीदना तय हुआ। जैसे ही, आरोपी प्लाज्मा लेकर आया, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया।
पकड़े गए आरोपियों ने खुलासा किया है, अभी तक वह 10 प्लाज्मा पैकेट बेच चुके हैं। प्लाज्मा असली है, लेकिन उसके साथ जो सर्टिफिकेट मिला है, वह फर्जी है। रैकेट के दो सदस्य जेएएच का वार्ड बॉय, ऑटो चालक पकड़े गए हैं, जबकि आईसीयू का अटेंडर अभी फरार है। यह प्लाज्मा कोरोना से स्वस्थ होने वाले लोग दान में प्लाज्मा बैंक को देते हैं।
एसपी ग्वालियर अमित सांघी ने बताया कि खबर मिल रही थी, कुछ लोगों रेमडेसिविर इंजेक्शन और प्लाज्मा की कालाबाजारी की जा रही है। इस पर एएसपी हितिका वासल को मामले के खुलासा करने के लिए लगाया गया। इसी बीच सूचना मिली, रैकेट में जेएएच के कुछ कर्मचारी शामिल हैं। झांसी रोड थाना थाना प्रभारी मिर्जा आसिफ बेग ने गिरोह के सदस्य ऑटो चालक से ग्राहक बनकर संपर्क किया।
उन्होंने खुद को कोविड पेशेंट का परिजन बताकर प्राइवेट हॉस्पिटल के लिए प्लाज्मा दिलाने की बात की। एजेंट से बातचीत कर डील तय होने पर उसने डॉक्टर का पर्चा भी मांगा। थाना प्रभारी ने एजेंट को डॉक्टर का पर्चा भी भेज दिया। तब एजेंट ने प्लाज्मा देने के लिए मांडरे की माता के पास बुलाया। थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ सिविल ड्रेस में पहुंच गए। उन्होंने देखा कि एक व्यक्ति पहले से ही प्लाज्मा लिए इंतजार कर रहा है। पुलिस ने उसके पास पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया। वह जेएएच का वार्ड बॉय श्याम गौतम निकला। उसकी निशानदेही पर रैकेट का एजेंट अनिल ऑटो चालक को भी गिरफ्तार कर लिया है। तीसरा साथी अभी फरार है। वह भी जेएएच के आईसीयू में अटेंडर है।
20 हजार रुपए में हुआ था सौदा
थाना प्रभारी ने जब एजेंट से कोरोना संक्रमित के परिजन बनकर बात की तो प्लाज्मा देने के लिए वह राजी हो गया। रुपए पूछे तो वह अनाप-शनाप मांगने लगा, लेकिन थाना प्रभारी ने उससे कहा कि वह गरीब आदमी है, कुछ कम कर लो। इस पर एजेंट उन्हें समझाने लगा कि वैसे ही प्लाज्मा मिल नहीं रहा है, वो तो तुम्हें किसी तरह मुहैया करा रहा हूं। इसके बाद सौदा 20 हजार रुपए में तय हो गया था।
फ्री का प्लाज्मा और वसूलते थे 20 से 30 हजार रुपए
गिरोह के सदस्य प्लाज्मा बैंक से ही प्लाज्मा लाते थे। प्लाज्मा असली होता था। इसमें अस्पताल का ही कर्मचारी सुपर स्पेशियलिटी में भर्ती दिखाकर फर्जी नाम व पर्चे पर बैंक से प्लाज्मा निकालते थे। यहां से शासकीय अस्पताल में भर्ती कोविड पेशेंट के लिए फ्री में प्लाज्मा मिलता था। इसके बाद वह इसे बाहर 20 से 30 हजार रुपए में बेच देते थे। पकड़े गए प्लाज्मा पैकेट के साथ सर्टिफिकेट भी मिला जो कि सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती किसी विजिता शाक्य पेशेंट के नाम पर है, जबकि इस नाम का कोई पेशेंट वहां भर्ती नहीं है। पुलिस को आशंका है कि प्लाज्मा बैंक से भी कोई न कोई सदस्य रैकेट से जुड़ा हो सकता था।
बीते साल भी पकड़ा गया था नकली प्लाज्मा रैकेट
प्लाज्मा की कालाबाजारी करने वाले गिरोह पिछले साल भी सक्रिय था। वर्ष अक्टूबर-नवंबर 2020 में पुलिस ने मिलावटी प्लाज्मा बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था। यही नहीं उन्हें गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भी पहुंचाया था। उसमें भी गिरोह का सरगना ने खुद को जेएएच अस्पताल में कर्मचारी बताया था, जबकि उसका भाई कर्मचारी था। यह प्लाज्मा चढऩे के बाद एक कोविड पेशेंट की मौत हो गई थी।
सराहनीय भूमिका
 उक्त गिरोह का पर्दाफाश करने में थाना प्रभारी झांसी रोड़ मिर्जा आसिफ वेग,, शत्रुद्यन मिश्रा, चेतन यादव, देवेन्द्र धाकड़, रामकेश गुर्जर, हितेश शर्मा, शिवकुमार, विश्वीर की सराहनीय भूमिका रही।