छत्रशाल की नगरी छतरपुर के अश्विनी कुशवाहा ने अपने नाम किया देश के पहले बुंदेली बावरा का खिताब
Apr 14 2021
भोपाल, 'बुंदेलखंड ट्रूपल' द्वारा आयोजित लोकगीत कलाकारों की पहली ऑनलाइन प्रतियोगिता, 'बुंदेली बावरा', का खिताब छतरपुर के 'अश्विनी कुशवाह' ने अपने नाम किया है। वर्चुअल प्लेटफार्म पर आयोजित हुए इस संगीत प्रतियोगिता के ग्रैंड फिनाले में कुल 6 प्रतिभागियों ने जगह बनाई, जिनमें चुने गए टॉप 3 फाइनलिस्ट में से एक का चुनाव, निर्णायक मंडल की सर्वसम्मति के साथ देश व प्रदेश के पहले बुंदेली बावरा के रूप में किया गया। इस दौरान मुख्य अथिति के रूप में शामिल हुए बुंदेलखंड विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष राजा बुंदेला व अभिनेत्री सुष्मिता मुखर्जी ने प्रतियोगिता की सराहना करते हुए, सभी को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी, एवं ऐसे कार्यक्रमों के सतत संचालन की अपील की। उल्लेखनीय है कि शो के विजेता और देश के पहले बुंदेली बावरा को 50 हजार तक की डिजिटल ब्रांडिंग व कई आकर्षक उपहारों से सम्मानित किया गया है।
लोक संस्कृति व लोकगीत की विरासत को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाने वाली इस प्रतियोगिता में 350 से अधिक कलाकारों ने हिस्सा लिया था। जबकि टॉप 3 में पहुंचे प्रतिभागियों को चैनल के को-फाउंडर व स्पेशल जज अतुल मलिकराम द्वारा बिना किसी वाद्य यन्त्र का इस्तेमाल किए, आला उदल के गीतों को प्रस्तुत करने का चैलेन्ज दिया गया। जिसे तीनों ही प्रतिभागियों ने बखूबी निभाया लेकिन जजेज पर अपनी आवाज का जादू चला पाने में अश्विनी कुशवाह सर्वश्रेष्ठ रहे। इस कार्यक्रम के मुख्य जज रहे प्रख्यात संगीतकार, परमलाल परम व बुंदेली कलाकार सचिन शेषा ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिनके माध्यम से प्रतिभाशाली युवाओं को एक सशक्त मंच पर प्रस्तुति देने का मौका मिला।
कार्यक्रम के दौरान राजा बुंदेला ने कहा कि, "बुंदेलखंड की संस्कृति और कला को बचाने की जरुरत है ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां इसे समझ सकें और देश विदेश में इसका गुणगान बता सकें।" उन्होंने कहा कि, शो के माध्यम से जिस तरह नारीशक्ति का बेमिसाल प्रदर्शन देखने को मिला, वह वाकई प्रशंसनीय है। वहीं प्रतिभागियों के सलेक्शन को बेहद कठिन बताते हुए जज परमलाल परम ने कहा कि, "सभी प्रतिभागी बेहद गुणी हैं और लोक संस्कृति की जड़ को बखूबी समझते हैं। लेकिन हमने सम्पूर्ण प्रदर्शन जिसमें प्रतिभागियों के परिधान से लेकर इंस्ट्रूमेंट और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसे फेक्टर्स को भी ध्यान में रखकर चयन किया है।"
बुंदेलखंड आर्टिस्ट एसोसिएशन व पीआर 24x7 के सहयोग से संचालित हुई इस प्रतियोगिता को सफल बनाने में बुंदेलखंड ट्रूपल की समस्त टीम तथा ऑनलाइन दर्शकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। वहीं प्रतियोगिता का मूल उद्देश्य बुंदेलखंड की लोक संस्कृति को जीवित रखते हुए, लोकगीत कलाकारों के लिए एक सशक्त व प्रभावशाली मंच उपलब्ध कराना है, ताकि संगीत जगत में बुंदेली कला की एक अलग पहचान स्थापित की जा सके, जो समय के साथ कहीं पीछे छूटती जा रही है। प्रतियोगिता में 350 से अधिक रजिस्ट्रेशन और 70 से अधिक प्रतिभागियों की ऑडिशन प्रक्रिया को 5 राउंड में संपन्न किया गया। जिनमें से कुल 5 प्रतिभागियों को फाइनल का टिकट मिला था। यह सभी छतरपुर, पन्ना, ललितपुर, महोबा आदि शहरों से आते हैं।
क्षेत्रीय कलाकारों का पहला ऑनलाइन मंच 'बुंदेली बावरा', बुंदेली प्रतिभाओ को उजागर करने व देशभर से परिचित कराने का उल्लेखनीय प्रयास कर रहा है। इससे पूर्व चैनल ने गाजल सम्राट जगजीत सिंह की याद में जूनियर जगजीत सिंह नामक प्रतियोगिता का ऑनलाइन आयोजन किया था। वहीं नए व युवा टैलेंट को नई पहचान दिलाने के मकसद से चैनल द्वारा ओपन माइक के तीन सीजन आयोजित किये जा चुके हैं।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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