नहीं रहे प्रख्यात रंगकर्मी अनिल शर्मा

Apr 14 2021

ग्वालियर। कोरोना अपने क्रूर पंजों में जकड़ कर रंगमंच के एक अदभुत कलाकार, निर्देशक, उदभट वक्ता अनिल शर्मा को अपने साथ ले गया है। ग्वालियर ही नहीं मप्र में शानदार डीलडौल वाली अपनी गर्वीली पहचान के धनी अनिल शर्मा सिर्फ एक हफ्ते पहले तक दोस्तों को जन्म दिन की बधाई दे रहे थे। अचानक कोरोना ने झपट्टा मारा और उन्हें लील गया।
शहर और शहर के हक की हर लड़ाई में अनिल भाई हमेशा साथ खड़े रहे। 'कालचक्रÓ नाटक से शुरू हुआ रंगमंच का सफर अनिल शर्मा ने छात्र जीवन में ही रंगमंच की राह पकड़ ली थी। एमएलबी कॉलेज में नाटक 'कालचक्रÓ का निर्देशन किया और अभिनय भी किया। आज सूत्रधार के स्वर में वो डायलॉग याद आ रहा है। 'सुनो कालचक्र.. तुम चलाओ अपना कालचक्र.. तेज..और तेज..और इतना तेज कि कोई मानव बचने न पाये... और कोरोना का कालचक्र अनिल शर्मा को ले गया।?
रंगमंच के लिए छोड़ दी सरकारी नौकरी 
कॉलेज के बाद अनिल एमपीईबी में मुलाजिम हो गए लेकिन रंगमंच उनका पहला प्रेम बना रहा। बाद में सरकारी नौकरी छोड़ दी और रंगमंच के लिये जीवन होम कर दिया। तीन दशक से ज्यादा के रंगकर्म में एक से एक शानदार नाटकों का निर्देशन किया और अदभुत अभिनय भी। वियात नाटकों में कोमल गांधार, प्रजा ही रहने दो,गारे की दीवार,फन्दी, नारायणपुर, बीमार, ताजमहल का टेंडर एक और द्रोणाचार्य, रक्तबीज, जिन लाहौर नहीं वेया, एक था गधा उर्फअलादाद खां, गुड बाय स्वामी, कथा कंस की जैसे वियात नाटक उनके निर्देशन की फेहरिश्त में शामिल हैं।
अनिल ने न जाने कितने कलाकार अपने हाथों से गढ़े हैं। कला वीथिका,नाट्य मंदिर, गालव सभागार की दरो- दीवार गवाह हैं कि अनिल शर्मा सर्दी, गर्मी, आंधी पानी की परवाह किये बगैर अनिल नाटकों के अयास के लिये दिन रात जूट रहते थे। अभी फरवरी मार्च तक वे दो बड़ी वेबसीरीज में अपने हिस्से की शूटिंग में व्यस्त थे। दुनिया के रंग मंच पर अपना बेहतरीन रोल अदा करके अनिल शर्मा आज विदा हो गए हैं।