ज्ञान की सही दिशा हमें सच्चे निर्ग्रन्थ गुरूओ से मिलती हैं-आचार्यश्री

Apr 06 2021

ग्वालियर। संसार के प्रत्येक आत्मा मे ज्ञान गुण भरा हुआ है। कोई भी जीव ऐसा नहीं जिसमें ज्ञान न हो, और इस ज्ञान की सही दिशा मे हमें सच्चें निग्र्रन्थ गुरूओ से मिलता है। हार सम्प्रदाय मे गुरू को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। कहते है-सारी पृथ्वी को कागज बनालूॅ, सारे वन की लकडियों को कलम बनाकर भी गुरू गुण लिखना अवश्यक है। गुरू गुणो के भण्डार हुआ करते है। जब गुरू की इतनी महिमा है तो प्रभु कितनी होगी। यह विचार आचार्यश्री विनीत सागर महाराज ने मंगलवार को नई सड़क स्थित चंपाबाग धर्मशाला मे वात्सल्य संत मिलन के दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने कहा कि माता पिता अपने परिवार के गृहस्थ जीवन में बच्चों को वो संस्कार दे जो कम समय मे योगी बन न सके तो भोगी नही उपयोगी जरूर बन जाएं। माता पिता अपने बच्चों को  धर्मगुरु ओर धर्म संस्कार से जुडऩे की आज बहुत आवश्यकता है। बच्चे आज गलत राह पर चल रहे है। मुनिश्री विजयेश सागर महाराज ने भी संबोधित किया। प्रवचन से पहले आचार्यश्री व मुनिराजों के चरणों मे आदर्शमय बर्षयोग समिति 2020 एवं जैन मिलन ग्वालियर के विनय कासलीवाल, संजीव अजमेरा, योगेश बोहरा, पंकज बाकलीवाल, वीरेंद्र गंगवाल, विनय कासलीवाल, संजीव अजमेरा, पंकज बाकलीवाल, आशीष जैन, जैन प्रवक्ता सचिन जैन, वीरेंद्र जैन, राजीव जैन, आदि ने श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया।
जैन संतो का वात्सल्य मिलन हुआ, मुनिश्री के गूंजे जयकारे
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि मंगलवार को नई सडक चंपाबाग धर्मशाला में आचार्यश्री विनीत सागर महाराज का भव्य वात्सल्य मिलन राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज एवं मुनि विजयेश सागर महाराज से हुआ। 
जैन सिध्दक्षेत्र सोनागिर से विहार कर पहुचे आचार्यश्री विनीत सागर महाराज की अगवानी करने मुनिश्री विजयेश सागर करने पहुंचे। राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर  महाराज एवं मुनिश्री विजयेश सागर महाराज ने साष्टांग दण्डवत प्रणाम आचार्यश्री विनीत सागर महाराज को किया तो उंहोने उठाया और गले से लगा लिया। वही मौजूद जैन समाज के लोगो ने भव्य मिलन देकर गुरूदेव के जयकारो से गूंज उठे।