कैंसर रोगी ने फांसी लगा कर जान दे दी , वृद्ध की मौत पर घिरे ऊर्जा मंत्री

Apr 05 2021

ग्वालियर। ग्वालियर में एक कैंसर पीडि़त बुजुर्ग ने फांसी लगा कर जान दे दी। उसने कुछ दिन पहले ही घर की दीवार पर दवाइयों के टाइम टेबल को टांगने के लिए मोटी कील ठोंकी थी। उसी कील पर वह फंदा लगाकर झूल गया। बेटे का आरोप है कि पिता इलाज में मदद मांगने पिछले एक महीने से ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह के घर और बंगले के चक्कर काट रहे थे, लेकिन गार्ड हर बार दुत्कार कर भगा देते थे। वह बीमारी से ज्यादा इस बात से हताश थे कि मंत्री के पास उसके लिए 2 मिनट का भी समय नहीं है। बुजुर्ग की खुदकुशी से गुस्साए परिजन शव लेकर ऊर्जा मंत्री के बंगले पर पहुंच गए। वहां प्रदर्शन शुरू कर दिया। इधर, मंत्री के पीए ने आरोप खारिज किए हैं।
घटना ग्वालियर के लवकुश नगर की है। बलराम शाक्य (65) ने अपने कमरे में लोहे की कील से साफी का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। परिजन उन्हें चाय देने पहुंचे तो वह फंदे पर लटके हुए थे। परिजन ने बलराम को नीचे उतारा, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। मामले की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। परिजनों ने बताया कि बलराम कैंसर से पीडि़त थे। बीमारी के कारण उनके शरीर में कीड़े पडऩे लगे थे। वह काफी समय से परेशान थे। गरीबी की वजह से अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया था। इसी से हताश होकर बलराम ने यह कदम उठाया है।
अक्सर साइकिल पर निकलकर लोगों से रूबरू होने वाले और गरीबों की मदद के लिए हर समय तैयार रहने का दावा करने वाले ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह पर इस बार गंभीर आरोप लगे हैं। बलराम के छोटे बेटे विष्णु शाक्य ने आरोप लगाया है कि एक महीने से पिता को लेकर ऊर्जा मंत्री से मिलने के लिए चक्कर लगा रहे थे। उनके घर और बंगले तक गए। लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने हमें दुत्कार दिया। हमने सोचा था कि ऊर्जा मंत्री कुछ आर्थिक सहायता करा देंगे, जिससे इलाज में आसानी हो जाएगी। पर उनके पास हमसे मिलने का समय ही नहीं था। बेटे ने कहा कि बीमारी से ज्यादा पिता ऊर्जा मंत्री के नहीं मिलने से हताश हो चुके थे।
कैंसर का पता चलने के बाद जब दवाइयों को खाने में भूल हो जाती थी तो बलराम ने कुछ समय पहले ही दीवार में एक कील ठोंकी थी। उसके साथ उसने दवा खाने का टाइम टेबल लगा रखा था।