305 साल पुरानी दरगाह पर श्रद्धा से झुक जाते हैं हिंदू-मुस्लिम के सिर

Apr 04 2021

ग्वालियर। हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का जीवंत उदाहरण बन चुकी सूफी संत पीर साहिब राजा बाक्षर महाराज की दरगाह पर उर्स समारोह आज से शुरू होगा। 305 साल पुरानी इस दरगाह पर जहां सभी धर्मों के लोगों का श्रद्धा से सिर झुक जाता है। राजा बाक्षर महाराज की दरगाह ऐसा पवित्र स्थान है जिसका नाम सुनकर श्रद्धालुओं के मन में आत्मिक श्रद्धा का संचार होने लगता है। शहर में प्रतिवर्ष तीन दिवसीय उर्स शरीफ महोत्सव का आयोजन हिंदू-मुस्लिम रीति रिवाज के अनुसार किया जाता है। उर्स में देश-विदेश से बड़ी संख्या में जायरीन जियारत के लिए आते हैं। उर्स शरीफ चैत्र माह के कृष्ण पक्ष तिथि की अष्टमी, नवमी और दशमी के दिन 5, 6 और 7 अप्रैल को मनाया जाएगा। 
मान्यता है कि पीर साहेब बाबा महाराष्ट्र के सतारा जिले के खातेगांव के रहने वाले थे। हर साल उर्स प्रारंभ होने से पहले ग्वालियर से जायरीन खातेगांव जाकर बाबा की जियारत करते हैं। वहां चादर पोशी करने के बाद उर्स का शुभारंभ किया जाता है। ग्वालियर में इतापे परिवार लगभग 305 वर्षों से पीढ़ी दर पीढ़ी पीर साहब की दरगाह पर सेवा कार्य करते आ रहे हैं।
रुद्राभिषेक से होगा उर्स का शुभारंभ
उर्स का शुभारंभ आज 5 अप्रैल को 11 ब्राह्मणों द्वारा के द्वारा बाबा का रुद्राभिषेक किया जाएगा। इसके बाद बाद दोपहर में बाबा की मजार पर चादर पोशी होगी। चादर पोशी के बाद बाबा की आरती उतारी जाएगी और ब्राह्मणों को भोजन कराया जाएगा। इसी दिन शाम को सच्चिदानंद ढोलीबुवा महाराज का कीर्तन होगा और रात्रि जागरण किया जाएगा। उर्स के दूसरे दिन 6 अप्रैल नवमी को चादर पोशी होगी। चादर पोशी के बाद बाबा की आरती उतारी जाएगी। इसके बाद भक्तों को महाप्रसादी का वितरण किया जाएगा। शाम 6 बजे से बाबा की शान में दरबार-ए-महफिल का आयोजन देर रात तक किया जाएगा। उर्स के तीसरे दिन दशमी को बाबा की पुण्यतिथि पर बाबा की मजार पर कुल के छींटे की रस्म अदा की जाएगी। इसके बाद कुर्बानी की रस्म अदा की जाएगी। दोपहर में फकीरों का लंगर आयोजित किया जाएगा। शाम 7 बजे से बाबा की मजार पर चादरपोशी होगी और महाआरती की जाएगी। इसके बाद कव्वालियों का आयोजन किया जाएगा जो देर रात तक चलेगा।