बिस्तर पर डमी रख कर भागा कैदी .जेएएच से 3 महीने में दूसरी बार भागा बंदी

Apr 03 2021

ग्वालियर। अंचल के सबसे बड़े अस्पताल के कैदी वार्ड से एक कैदी भाग गया। उसने हथकड़ी सरका कर निकाल दी। बिस्तर पर कंबल और तकिए से डमी बना दी। इससे लोगों को लगे कि वह सो रहा है। कैदी भाग गया और वार्ड के बाहर सो रहे प्रहरी को पता ही नहीं चला। कैदी दुष्कर्म और अपहरण मामले में सजा काट रहा था। यही बंदी ठीक 3 महीने पहले जेएएच (जयारोग्य अस्पताल) के इसी वार्ड से कड़ी सरका कर फरार हुआ था। तब भी पत्नी पास सो रही थी और बाहर दो प्रहरी गहरी नींद में थे। एक ही जगह से एक ही तरह से दो बार बंदी के भागने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जेल प्रहरी को सस्पेंड कर दिया गया है।
सागर निवासी 37 वर्षीय मोहन पुत्र कल्लू अहिरवार को दुष्कर्म और अपहरण के मामले में सजा हुई थी। उसे टीबी की गंभीर बीमारी है। अभी वह ग्वालियर केन्द्रीय जेल में बंद था। गंभीर हालत को देखते हुए उसे कुछ दिन पहले जेएएच लाया गया था। जहां उसको हर दिन खून की उल्टी हो रही थी। शुक्रवार रात 12 से शनिवार सुबह 6 बजे तक जेल प्रहरी पंकज अग्रवाल जेएएच के बंदी वार्ड के बाहर पहरा दे रहा था। अंदर बंदी मोहन भर्ती था। देखभाल के लिए पास ही बंदी की मां और पत्नी भी सो रही थीं।
रात 3 बजे तक जेल प्रहरी ने मोहन को सोता हुआ देखा था। इसके बाद प्रहरी की झपकी लग गई। इसी समय बंदी मोहन ने अपने हाथ पर बंधी हथकड़ी को सरकाया और भाग गया। पकड़ा न जाए इसके लिए बिस्तर पर तकिया और चादर की डमी बनाकर रख गया। घटना का पता सुबह उस समय लगा जब जेल प्रहरी पंकज की नींद खुली। बंदी के भाग जाने की खबर से हंगामा खड़ा हो गया। जेल अधीक्षक मनोज साहू मौके पर पहुंच गए। उन्होंने जेल प्रहरी पंकज को तत्काल सस्पेंड कर दिया है। साथ ही सिर्फ एक ही प्रहरी की ड्यूटी लगाने पर अफसरों को फटकार लगाई है।
पत्नी-मां भी रह गई सोती
बंदी की बीमारी के चलते उसकी मां, पत्नी और एक अन्य रिश्तेदार भी अस्पताल में थे और जिस समय मोहन भागा, वह भी कुछ दूरी पर उसी वार्ड में सो रहे थे। बंदी के भागने का पता उनको भी नहीं चला। पुलिस उनसे भी पूछताछ कर रही है। साथ ही बंदी मोहन की तलाश में नाकाबंदी कर दी गई है।
एक ही तरह से दो बार भागा, इत्तेफाक या साजिश
बंदी मोहन पुत्र कल्लू अहिरवार पहली बार नहीं भागा है। ठीक तीन महीने पहले 29 दिसंबर को वह इसी तरह भाग था। 18 दिसंबर को उसे बीमारी के चलते उपचार के लिए भोपाल से ग्वालियर जेल भेजा गया था। 29 दिसंबर को पत्नी और दो जेल प्रहरी को बाहर सोता छोड़कर वह इसी तरह कड़ी सरका कर फरार हो गया था। एक महीने पहले ही उसे वापस पकड़ा गया है। उसके तीन महीने में दो बार एक ही तरह से भागना सिर्फ इत्तेफाक है या साजिश यह सवाल तो खड़ा होता है।
जेल अधीक्षक मनोज साहू ने बताया कि सागर का रहने वाला मोहन दुष्कर्म और अपहरण के मामले में सजा काट रहा है। उसकी तबीयत खराब हुई तो उसे सागर से भोपाल ट्रांसफर किया गया था। हालत बिगडऩे पर भोपाल से ग्वालियर लाया गया था। यहां पर खून की उल्टी करने पर उसे जेएएच में भर्ती कराया था। यहां पर जेल प्रहरियों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा था।