मित्रता हो तो कृष्ण और सुदामा जैसी: शास्त्री

Mar 22 2021

ग्वालियर। साईं मंदिर पंजाबी मोहल्ला जनकगंज में चल रही सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन सुप्रसिद्ध कथा व्यास घनश्याम शास्त्री की विभिन्न प्रसंगों पर प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि सातवें दिन कृष्ण के अलग-अलग लीलाओं का वर्णन किया गया। मां देवकी के कहने पर छह पुत्रों को वापस लाकर मा देवकी को वापस देना सुभद्रा हरण का आयान कहना एवं सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए भागवताचार्य ने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्री कृष्ण सुदामा जी से समझ सकते हैं । उन्होंने कहा कि सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र से सखा सुदामा मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। उन्होंने कहा कि सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढऩे लगे द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना प्रभु सुदामा सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया दोनों की ऐसी मित्रता देखकर सभा में बैठे सभी लोग अचंभित हो गए। कृष्ण सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाया हुआ। उन्हें कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया। जब जब भी भक्तों पर विपदा आ पड़ी है। प्रभु उनका तारण करने अवश्य आए हैं। हमारे साईं बाबा मंदिर की तरफ से पंजाबी मोहल्ला में चल रही सात दिवसीय कथा शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। कथा व्यास घनश्याम शास्त्री ने कहा कि जो भी भागवत कथा का श्रवण करता है उसका जीवन धन्य हो जाता है इस अवसर पर मंदिर पुजारी दीपक पंडित, राज अरोरा, हिमांशु खत्री, महिंद्रा अरोरा, शैलेन्द्र शर्मा ने आरती की।