शहीद ग्रुप कैप्टन आशीष गुप्ता पंचतत्व में विलीन
Mar 18 2021
ग्वालियर। ग्वालियर एयरबेस पर मिग-21 बाइसन कैश में शहीद ग्रुप कैप्टन आशीष गुप्ता का गुरुवार को अंतिम संस्कार किया गया। ग्रुप कैप्टन दो साल पहले बालाकोट एयर स्ट्राइक में भी शामिल थे। देश के जाबांज बेटे को मुखाग्नि उनके 9 साल के बेटे अतिन उर्फ टिनटिन व चचेरे भाई अमित गुप्ता ने मुरार मुक्तिधाम में दी। इस अवसर पर उनको गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। वायुसेना, सेना के अफसरों के अलावा कलेक्टर कौशलेेंद्र सिंह, एसपी ग्वालियर अमित सांघी ने श्रद्धांजलि दी।
एयरफोर्स के ग्रुप कैप्टन आशीष गुप्ता ने फाइटर प्लेन मिग-21 बाइसन को प्रैक्टिस के लिए ट्रेकऑफ किया था। इसी दौरान तकनीकी खराबी आने से प्लेन क्रेश हो गया। इसमें वह शहीद हो गए थे। घटना दोपहर 12 बजे के लगभग हुई थी। शहीद आशीष गुप्ता उरई यूपी के मूल निवासी थे, लेकिन अभी ग्वालियर में ही रह रहे थे। गुरुवार को उनका अंतिम संस्कार ग्वालियर के मुरार मुक्तिधाम किया गया है। आशीष गुप्ता वर्ष 1999 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुए थे। उनके परिवार में पत्नी छाया व दो बेटे 9 वर्षीय अतिन उर्फ टिनटिन, 3 वर्षीय आदी उर्फ आदबिक है। पिता प्रकाश चन्द्र गुप्ता रिटायर्ड बैंक मैनेजर हैं और अभी फैजाबाद में रहते हैं। मां कृष्णाकांती देवी टीचर थीं और 4 साल पहले उनका निधन हो चुका है।
शहीद के बहनोई ग्वालियर के हरिशंकरपुरम निवासी रजनीकांत विश्वारी ने बताया कि आशीष शुरू से ही पढ़ाई में होशियार थे। 1999 में एनडीए के जरिए वायुसेना में सिलेक्ट हुए थे। कम समय में अपने हुनर से उन्होंने अच्छा मुकाम पा लिया था। वैसे तो काफी मिलनसार थे, लेकिन एयरफोर्स के चलते वह किसी से ज्यादा बात नहीं करते थे। किसी भी परेशानी में हंसते हुए कहते थे नो प्रॉब्लम। 2 महीने पहले एयरफोर्स में उनसे मुलाकात हुई थी। तब से उनसे मुलाकात नहीं हो सकी थी।
रजनीकांत ने यह भी बताया कि शहीद आशीष गुप्ता 26 फरवरी 2019 को सीमा के दूसरी ओर बालाकोट एयर स्ट्राइक में आतंकवादियों के धूल चटाने वाले हीरो में भी शुमार थे। पूरी स्ट्राइक में उनका अहम रोल था। पर इसका कभी उन्होंने जिक्र तक नहीं किया। कभी-कभी अपनी पत्नी को जरूर बताते थे।
शहीद ग्रुप कैप्टन ए गुप्ता के बहनोई रजनीकांत विशवारी ने बताया कि उनको आशीष की पत्नी से हादसे के बारे में पता लगा था। उनको एयरफोर्स से सूचना दी गई थी कि हादसा हो गया है। इस पर हम लोग वहां पहुंचे तो बताया गया कि जब ग्रुप कैप्टन आशीष फाइटर प्लेन मिग-21 बाइसन लेकर निकल रहे थे तो रनवे पर दौड़ते समय प्लेन में कुछ खराबी आई पहले आशीष ने सोचा कि सामने जाल में टक्कर मार देंगे तो फाइटर प्लेन रूक जाएगा। यह जाल भी इसीलिए लगा रहता है, लेकिन वहां तक वह नहीं पहुंच पाए। पहले ही प्लेन में आग लग गई। वह प्लेन से बाहर नहीं निकल पाए। इतने में ब्लास्ट हो गया और आशीष उसमें झुलस गए।
9 साल के अतिन अभी ठीक से समझ भी नहीं पा रहा है कि उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं। मुखाग्नि देने के बाद जब उससे पूछा कि उसे पता है उसके पिता को क्या हुआ है तो उसने कहा हां पापा शहीद हो गए हैं। मासूम कह तो आसानी से गया कि पिता शहीद हो गए हैं, लेकिन उसे नहीं पता अब हमेशा के लिए उसके पिता उससे दूर हो गए हैं। ग्रुप कैप्टन आशीष गुप्ता की मौत इस तरह हुई है कि उनकी पत्नी, बच्चे आखिरी बार चेहरा भी नहीं देख पाए हैं। दूर से बॉक्स में छाया को उसके पति की पार्थिव देह दिखाई गई है।
ग्रुप कैप्टन आशीष गुप्ता वैसे तो व्यावसायिक खानदान से ताल्लुक रखते है। उनके दादा हिम्मत राम गुप्ता उरई के तुलसी नगर के जाने माने व्यवसायी थे। पूरे इलाके में उनका नाम था। गल्ला से लेकर आढ़त उनका धंधा था। उनके पिता बैंक मैनेजर बने। पर आशीष घर में सबसे होशियार था। वह चाहता तो दादा का धंधा संभाल सकता था, लेकिन उसका मकसद देश की सेवा करना था। शायद ऐसा करके दिखाना था कि उसे सब याद करें।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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