अज्ञात वाहन की टक्कर से छात्र शौचालय की दीवार से टकराए, मौके पर ही दोनों की मौत
Mar 15 2021
ग्वालियर। आखिरी पेपर शुरू होने के चंद मिनट पहले 2 छात्रों की दर्दनाक मौत हो गई। दोनों स्कूल से बाइक की टेस्ट ड्राइव के लिए निकले थे। स्कूल वापस आते, उसके पहले ही एक अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। बाइक बेकाबू होकर डिवाइडर पर चढ़ी और सार्वजनिक शौचालय से जा टकराई। दोनों दीवार से टकरा गए। सिर में गंभीर चोट लगने से मौके पर ही दोनों ने दम तोड़ दिया। दोनों छात्र अपने-अपने परिवार के इकलौते बेटे थे। वे केंद्रीय विद्यालय के 9वीं क्लास के छात्र थे। घटना ग्वालियर के थाटीपुर होटल रमाया के पास सोमवार सुबह की है।
थाटीपुर थाना क्षेत्र के न्यू जीवाजी नगर निवासी दिव्यांशु सोलंकी पुत्र राकेश सिंह सोलंकी (17) केंद्रीय विद्यालय में 9वीं कक्षा का छात्र था। सोमवार को उसका आखिरी पेपर था। इसी समय उसका साथी गुढ़ा नादरिया की माता के पास निवासी आशीर्वाद राजपूत पुत्र ओमप्रकाश राजपूत (17) मिला। आशीर्वाद अपने पिता की बाइक से स्कूल आया था। बाइक एमपी07एनडी-6046 से स्कूल के गेट पर पहुंचा। आशीर्वाद के पिता सेना से रिटायर्ड मेजर हैं।
स्कूल में एंट्री में 20 मिनट का समय बचा था। इसलिए वे बाइक चलाने के लिए निकल गए। अभी वह रमाया होटल के पास पहुंचे ही थे कि अज्ञात वाहन ने पीछे से उनकी बाइक में टक्कर मार दी। बाइक अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ते हुए सार्वजनिक शौचालय से जा टकराई। दीवार से दोनों के सिर टकराने से मौके पर ही मौत हो गई। राहगीरों ने पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। सूचना मिलते ही थाटीपुर थाना पुलिस के साथ ही डीएसपी नरेश अन्नोटिया मौके पर पहुंचे। छात्रों के शवों को डायल 100 से अस्पताल के लिए रवाना किया।
स्कूल में 8.20 बजे एंट्री का टाइम था। इस पर दिव्यांशु ने आशीर्वाद से कहा, वह उसकी बाइक की टेस्ट ड्राइव लेना चाहता है। इसके बाद दोनों स्कूल के बाहर से ही टेस्ट ड्राइव पर निकल गए। आकाशवाणी से मेला सूर्य नमस्कार चौराहा पर पहुंचे। वहां से वापस स्कूल के लिए लौट रहे थे। बाइक दिव्यांशु चला रहा था, वह स्पीड में था। वह रमाया होटल के सामने थे, तभी पीछे से तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। इसके बाद बाइक बेकाबू होकर डिवाइडर पर चढ़ी और सड़क किनारे बने सार्वजनिक शौचालय की दीवार से जा टकराई, जिसमें दोनों छात्रों की मौत हो गई।
दोनों छात्रों के मुंह इतनी जोर से शौचालय की दीवार में पड़े कि चेहरे के मास्क दीवार में ही गड़ गए
सोमवार सुबह सार्वजनिक शौचालय की जिस दीवार से छात्र बाइक समेत टकराए थे, उस दीवार पर गड़े छात्रों के मास्क दर्दनाक मौत की कहानी बयां कर रहे थे। हादसे के समय बाइक की स्पीड करीब 100 या उससे ज्यादा रही होगी। छात्र सार्वजनिक शौचालय की दीवार से इतनी तेजी से टकराए, उनके मुंह और सिर टाइल्स में घुस गए।
छात्रों के मास्क दीवार में ही गड़े रह गए। उनके सिर से मांस के चीथड़े टाइल्स पर जा चिपके। पुलिस ने घटना स्थल से खरोंचकर चीथड़े निकाले हैं। सोमवार सुबह 8.10 बजे हादसा आकाशवाणी के पास होटल रमाया के सामने हुआ। दोनों केन्द्रीय विद्यालय-1 के छात्र थे। सोमवार को वह परीक्षा देने जा रहे थे। छात्र घर ये कहकर निकले थे कि आखिर पेपर है, जल्दी पहुंचना है। उन्हें पता नहीं था, जीवन का आखिरी पेपर हो गया।
बोलकर गया था- आज आखिरी पेपर है
दिव्यांशु और आशीर्वाद दोनों ही केन्द्रीय विद्यालय-1 में 9वीं के छात्र थे। दोनों का सोमवार को आखिरी पेपर था। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर दिव्यांशु के पिता राकेश सोलंकी रोते हुए बेटे को याद कर कह रहे थे, सुबह कह कर निकला था कि आज आखिरी पेपर है, लेकिन नहीं पता था कि यह उसकी जिंदगी का आखिरी पेपर हो जाएगा।
दोनों छात्रों की उम्र की 18 वर्ष से कम थी, फिर भी उन्हें बाइक दी गई। इसके बाद वे हेलमेट भी नहीं पहने थे। छात्र यदि हेलमेट पहने होते, तो शायद जान बच सकती थी, क्योंकि उनके शरीर पर कहीं भी खरोंच तक नहीं है। जो भी चोट है, वह सिर और मुंह पर है।
जब आशीर्वाद की मां को हादसे का पता लगा, तो वह बेसुध हो गईं। किसी तरह अस्पताल पहुंची, उन्हें बताया गया था कि बेटा घायल है, लेकिन वहां पहुंचकर पता लगा कि बेटे की मौत हो चुकी है। वह बार-बार कह रही थीं, कोई आशीर्वाद को बुला लाओ। दिव्यांशु की मां को दोपहर तक नहीं बताया गया था कि बेटे की मौत हो गई है। दोपहर जब शव लेकर पहुंचे, तो घटना का पता लगा।
दिव्यांशु और आशीर्वाद दोनों काफी जिंदादिल थे। चार दिन पहले पहले ही उन्होंने अपने दोस्त का जन्मदिन मनाया था। जिसमें सड़क पर ही केक काटकर एक-दूसरे का केक से चेहरा बिगाड़ा था। वो पल कैमरे में भी कैद किया था।
स्कूल से वापस खींच कर लाई मौत
कहते हैं कि मौत खींच कर लाती है और यह बात छात्रों पर चरितार्थ हो गई। दिव्यांशु और आशीर्वाद समय से पहले सकुशल स्कूल पहुंच गए अचानक उनके मन में घूमने का प्लान बना और पेपर में भी आधा घंटा का समय था तो दोनों ने मन बना लिया। अगर दस-पंद्रह मिनट और स्कूल में रुक जाते तो शायद काल की घड़ी रुक जाती। लेकिन जब काल आता है तो अच्छा खासा व्यक्ति भी अपने आपको संभाल नहीं पाता और यही ब"ाों के साथ हुआ।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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