केन्द्र के फरमान द्वारा बिजली कर्मचारियों पर कहर, लेकिन केन्द्र के समान सुविधा से प्रदेश कर्मी वंचित

Mar 10 2021

ग्वालियर। म.प्र. बिजली आउटसोर्स कर्मचारी संगठन के प्रांतीय संयोजक मनोज भार्गव के नेतृत्च में रोशनीघर में बिजली कर्मचारियों ने गेट मिटिंग व नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। इस अवसर पर भार्गव ने कहा कि चाहे स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट हो या विद्युत अधिनियम 2020 हो, यह नित नये फरमान केन्द्र सरकार बिजली कर्मचारियों पर थोप कर कहर बरपा रही है पर केन्द्र के कुशल आउटसोर्स को मिलने वाली न्यूनतम मजदूरी 20 हजार एवं नियमित-संविदा को मिलने वाला बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता, सातवा वेतनमान अनुसार एच.आर.ए. एवं कन्वेंस एलाउंस नही मिल पा रहा है एवं एल.टी.सी. आदि एलाउंस बिजली कर्मियों को म.प्र. सरकार नही सौंप रही है। यहां तक कि ठेका कर्मियों को एक तारीख को मिलने वाला मासिक वेतन 9 तारीख बीतने पर भी नही मिला है।  
श्री भार्गव ने कहा कि रसोई गैस रूला रही है, पेट्रोल पॉकिट के परखच्चे उड़ा रही है, पर सरकार कर्मचारियों को पेट्रोल डीजल के रियायती कूपन नही दे रही है। केन्द्र में महंगाई भत्ते की दर 21 प्रतिशत की तुलना मे म.प्र. में मात्र 12 प्रतिशत डी.ए. दिया जा रहा है। यहां तक कि वेतन वृद्धि 9 माह से नही मिली है। केन्द्र के कुशल आउटसोर्स कर्मी 20 हजार रूपये पाते है तो म.प्र. के मात्र 10 हजार रूपये प्रतिमाह पा रहे है। म.प्र. सरकार आत्मनिर्भर अभियान का बिगुल बजा रही है पर आत्मनिर्भर रोड़ मेप एवं आत्मनिर्भर प्रोजेक्ट से बिजली आउटसोर्स कर्मी आउट है, उसे ठेकेदार की पराधीनता से मुक्त कर आत्मनिर्भर क्यों नही बनाया जा रहा है? जबकि सीधे वेतन देने से म.प्र. सरकार के प्रतिवर्ष 300 करोड़ रूपये बचेंगे।