रिटायर्ड एसडीओ ने गोली मार खुदकुशी की

Mar 02 2021

ग्वालियर। दो साल पहले कृषि विभाग से रिटायर्ड एसडीओ ने अपनी ही बंदूक से गोली मारकर खुदकुशी कर ली। वह रतिराम गार्डन के पास विनय नगर सेक्टर-4 में रहते थे। मंगलवार सुबह हुई घटना की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला है।
रिटायर्ड एसडीओ ने सुसाइड नोट में अपना दर्द बयां किया है। लिखा- मकान के लिए बहू ने मुझे चोर कहा। उसके पिता-भाइयों ने मुझे पीटा और झूठे मामले दर्ज कराए। मेरी सामाजिक हत्या की है। अब जीना नहीं चाहता हूं। पुलिस ने शव को निगरानी में लेकर जांच शुरू कर दी है।
बहोड़ापुर विनय नगर सेक्टर-4 निवासी 62 वर्षीय राजेन्द्र सिंह राजपूत कृषि विभाग से रिटायर्ड एसडीओ थे। वह 9 सितंबर 2018 में बिलासपुर छत्तीसगढ़ से रिटायर हुए थे। परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटे हैं। बड़ा बेटा प्रोफेसर है और अभी शिवपुरी में पदस्थ है। छोटा बेटा शहर में ही किसी शासकीय विभाग में पदस्थ है। बड़े बेटे की बहू प्रीति सिंह का मायका शिवपुरी में है। ससुर की बहू से नहीं बनती थी। बहू और उसके मायके के लोग विनय नगर स्थित प्रॉपर्टी को बहू के नाम करने के लिए कह रहे थे। इसी से राजेन्द्र सिंह परेशान थे।
मंगलवार सुबह वह जागे। पत्नी के हाथ की चाय पी। इसके बाद पत्नी अन्य काम में लग गई। उन्होंने अलमारी से अपनी 12 बोर की दोनाली बंदूक निकाली और ठोढ़ी पर अड़ाकर ट्रिगर दबा दिया। गोली उनके जबड़े को चीरती हुई दीवार में लगी। गोली की आवाज सुनकर पत्नी और आसपास के लोग वहां पहुंचे, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
बहोड़ापुर थाना पुलिस मौके ने जांच शुरू कर दी है। साथ ही फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. अखिलेश भार्गव मौके पर पहुंचे। उन्होंने बारीकी से पूरे घटना स्थल की जांच की है। दो नाल में एक जिंदा कारतूस व एक चला हुआ खोका मिला है।
बेइज्जती से आहत थे कृषि अधिकारी
सुसाइड नोट में पूर्व कृषि अधिकारी ने लिखा, 30 सितंबर 2018 को रिटायर होने के बाद अभी तक एक दिन भी बहू ने कभी खाना परोसकर नहीं दिया। हमेशा बेइज्जत किया। मुझ पर चोरी का आरोप लगाया और दोगला कहा। हद तब हो गई जब कल्लन सरपंच की बहू को मेरे सामने बेइज्जत किया। झूठे आरोप लगाते हुए फोटो सोशल मीडिया पर डाले। 3 जुलाई 2020 को बहू प्रीति और उसके पिता परिमाल सिंह, भाई प्रमोद उर्फ चिंटू और मनीष सिंह ने मेरे घर पर हमला बोल दिया। मुझसे मारपीट की। बहू ने शिवपुरी और ग्वालियर में झूठे मामले दर्ज कराए। जिससे मेरी सामाजिक हत्या हुई है। इनके कारण अब जीना नहीं चाहता हूं।
एक माह पहले ही छोटे बेटे के पास आए थे रहने
घटनास्थल पर मृतक के डेयरी संचालक चचेरे भाई कमलेश राजपूत निवासी सौफुटा रोड आश्रम के सामने ने बताया कि उनके दो बेटे हैं। चैतन्य और विवेक। बड़े बेटे चैतन्य का निवास डीडीनगर में है और छोटे बेटे विवेक एजी ऑफिस में सीनियर ऑडीटर के पद पर पदस्थ हैं। वे डीडीनगर के निवास से छोटे बेटे के विनय नगर स्थित निवास पर एक माह पहले ही रहने आए थे। छोटे बेटे विवेक ने करीब दस साल पहले इस मकान का निर्माण कराया था।
दो दिन से ज्यादा बात नहीं कर रहे थे
जानकारी में सामने आया कि सुबह वह जल्दी उठे और थोड़ी देर के लिए अपने कमरे से बाहर आए, फिर उसके बाद अंदर चले गए। कमरे में पुरानी लोहे की अलमारी में 12 बोर की दुनाली गन निकालकर उन्होंने अपने सिर से सटाई और फायर कर दिया। फायर की आवाज घर में गूंजी तो सभी कमरे की तरफ भागे। कमरा बंद नहीं था। बिस्तर और जमीन पर खून बिखरा हुआ था।
सुसाइट नोट में जिमेदारों के लिखे नाम
मृतक ने सुसाइड नोट में लिखा कि 2018 में रिटायर्ड होकर घर आया तो बड़े बेटे चैतन्य की पत्नी प्रीति और उसके पिता, भाई प्रमोद समेत मनीष और अन्य परिवार के लोगों ने उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल की। उनके साथ मारपीट की गई और शिवपुरी थाने और ग्वालियर में हमारे खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। पूरा मामला संपति को हड़पने और ब'चों को फंसाने का था। बड़ी बहू के नाम पर उसके परिवार वालों ने पूरी संपति कराने को लेकर दबाव बनाया। ऐसे में मेरी जीने की इ'छा समाप्त हो चुकी है। मेरी हत्या का जिमेदार इनसभी को माना जाए।
काफी पुरानी है लायसेंसी गन
12 बोर की लायसेंसी दो नाली गन काफी पुरानी है। परिवार के एक रिश्तेदार ने बताया कि गन हमेशा अलमारी में ही रहती थी। कभी भी बाहर नहीं निकालते थे। एफएएसएल की टीम ने गन को कजे में लेकर जांच की तो एक ही खाली कारतूस अंदर फंसा था।