कथा को ग्रहण करने से होता है उद्धार

Feb 24 2021

ग्वालियर। श्रीमद् भागवत कथा कल्याणकारी कथा है और इस कथा के एक अंश को भी जो व्यक्ति अपने जीवन में उतार ले तो उसका उद्धार निश्चित है। लेकिन उसके जीवन में चाहे कोई भी कठिनाइयां आए स्थिर रहे तो परिवार समाज और व्यक्ति की प्रतिष्ठा हमेशा बरकरार रहती है।
कथा के भाव के प्रभाव से ही व्यक्ति अपने जीवन को हमेशा के लिए बदल सकता है। यह कथा सुनने के बाद जब जेल से घर जाएं तो लोगों को लगे कि आप मैं कथा के प्रभाव से कितना बदलाव हुआ है। क्योंकि अंधेरे में कभी प्रकाश नहीं होता ईश्वर की इच्छा से ही सब कुछ संभव है। और आज आप उस ईश्वर की कथा को साक्षात सुन रहे हैं अब भाव आपको देखना है। कि किस तरह मन लगाकर कथा के भाव को स्थिर होकर मन में संकल्प ले। ईश्वर हमेशा सबके दिल के नजदीक होता है। वह किसी को पराया नहीं मानता। यह बात केंद्रीय कारागार में चल रही भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के अंतिम दिन संत कृपाल सिंह महाराज ने कैदियों के मन के भाव को बदलने के लिए कहीं।
केंद्रीय कारागार में चल रहे भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिवस में संत गोपाल शरण महाराज द्वारा कथा को विश्राम देते हुए आज वसंत उत्सव मनाया गया इस दौरान फाग गायन, होली, मल्हार एवं कथक नृत्य की प्रस्तुतियां पेश की गई जिसमें प्रियांशी चतुर्वेदी संस्था कत्थक विद्या द्वारा कत्थक नृत्य पेश किया गया, वहीं राधा कृष्ण के फूलों की होली फाग गीतों के साथ बड़े ही आनंदमई उत्सव के साथ मनाई गई जिसमें कृष्ण का अभिनय नितिन गौड एवं राधा का अभिनय डोली राठौर द्वारा किया गया।