श्रद्धा भाव से किया दान फलदाई होता है: गोपाल शरण

Feb 22 2021

ग्वालियर। जीवन में जो व्यक्ति जैसा करता है उसको वैसा फल मिलता है। इसीलिए कहा गया है कि जैसा मन में भाव रखते हुए दान पुण्य किया जाता है उसी तरह के फल ईश्वर व्यक्ति के जीवन फल देता है। कलयुग का लेखा जोखा इसी धरती पर पूरा करना है। इसलिए मन का भाव हमेशा प्रसन्न और धार्मिक होना चाहिए यह बात केंद्रीय कारागार में चल रही भागवत कथा के दौरान व्यास गद्दी से संत गोपाल शरण महाराज ने कही।
केंद्रीय कारागार में भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के चौथे दिन की कथा मन भूल मत जइयो राधा रानी के चरण भक्ति संगीत के साथ व्यास गद्दी से गोवर्धन की कथा के बाद कृष्ण लीलाओं का वर्णन करते हुए कंस वध एवं रुमणी विवाह की कथा में ऐसा लग रहा था मानो कि आज केंद्रीय कारागार मैं विवाह समारोह बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। रुकमणी विवाह के अवसर पर जेल अधीक्षक कि आज 25वीं शादी की सालगिरह के अवसर पर जेल अधीक्षक मनोज साहू दूल्हा के रूप में सजे हुए थे और उनकी पत्नी श्रीमती रश्मि साहू रुकमणी रूपी दुल्हन के रूप में सजाया गया था इस अवसर पर महाराष्ट्रीयन पद्धति से वेद मूर्ति पंडित जगन्नाथ शास्त्री एवं पंडित प्रसाद मोने द्वारा मंत्रोचार के द्वारा 25 वीं वर्षगांठ के विवाह मिलन अवसर का रूप देकर आज के रुमणी विवाह हो आनंदमई बना दिया।
इस अवसर पर श्री साहू की मां श्रीमती लक्ष्मी साहू द्वारा दूल्हा दुल्हन को आशीर्वाद दिया इस अवसर पर भाजपा नेता अशोक पार्ट्स आरियाने कहा के जेल में भागवत कथा आज भव्य रूप में सुनाई जा रही है वह एक ऐतिहासिक कार्य है और जिसे जेल अधीक्षक श्री साहू अपने कर्तव्यों से हटकर जेल में बंद कैदी भाइयों के मन की भावनाओं को बदलने का जो प्रयास कर रहे हैं वह अनुकरणीय हैं इस अवसर पर उन्होंने भंडारे के लिए 21, हजार रुपए का सहयोग भी प्रदान किया । कार्यक्रम में उपस्थित मंशापूर्ण हनुमान मंदिर के महंत गोपाल , मजिस्ट्रेट मानवेंद्र सिंह, श्रीमती यदु नंदिनी, उप अधीक्षक विपिन दंडोतिया, डीएसपी श्रीमती रितु केबरे, टीआई प्रशांत यादव, एनके प्रजापति, प्रवीण त्रिपाठी, राजेंद्र सिंह तोमर, डॉ. सर्वेश पुरोहित, डॉ. गजेंद्र राजावत, बल्ली यादव सहित अनेकों भक्तगण एवं कैदी बंधु उपस्थित थे। आज भागवत कथा में सुदामा चरित्र का पाठ किया जाएगा।
धर्म के माध्यम से मन परिवर्तन व्यक्ति के जीवन में अ'छे और बुरे एवं खुशी और गम के भी दिन आते हैं। लेकिन व्यक्ति जीवन में थोड़े से कठिनाइयों के दिनों में या विषम परिस्थितियों में अपने मन पर काबू पा लेता है। वह व्यक्ति हमेशा सुखी रहता है और इसके लिए धर्म का माध्यम बहुत महत्वपूर्ण है ।यहां आज रुकमणी विवाह के अवसर पर सभी कैदी भाइयों ने मुझे शुभकामनाएं दी हैं लेकिन मैं इन सभी से यही कहूंगा के आप हमेशा सुखी रहें और ऐसा कोई कार्य न करें कि जिससे फिर इस तरह का फल आपको भोगना पड़े यह कथा सभी कैदी भाइयों के मनो को परिवर्तन करने के लिए सुनाई जा रही है। मेरा भी प्रयास रहता है की भक्ति के कार्यक्रम जेल में चलते रहे जिससे जेल का वातावरण शांति में बना रहे।