वचन का मान रखने के लिए राजा दशरथ के पुत्र रूप में राम नेअवतार लिया

Feb 21 2021

ग्वालियर। ऋषि सेवा समिति ग्वालियर के तत्वाधान में चल रही मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के पावन चरित्र पर आधारित संगीतमय श्रीराम कथा मंदाकिनी के तृतीय दिवस स्थानीय इन्द्रमणि नगर सनसिटी के पीछे प्रांगण में कथा का श्रवण पान कराते हुए वक्ताश्रीविद्या सिद्ध संत ज्योतिष राघव ऋषि ने राम जन्म के दिव्य रहस्य के पश्चात के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि दिए गए वचन का मान रखने के लिए राजा दशरथ के पुत्र रूप में अवतार लिया। आज पूरी अयोध्या उत्साह से उत्सव मना रहे हैं। कथा क्रम को आगे बढ़ाते हुए पूज्य श्री ने बताया प्रभु श्री राम भाइयों सहित धीरे धीरे बड़े हो रहे हैं बाल लीलाओं को देख दशरथ कौशल्या खुशी से फूले नहीं समाते। ऋषियों मुनियों के यज्ञ में बाधा उत्पन्न कर रहे सुर समूह से सताए जा रहे ऐसी दशा जान गाधितनय विश्वामित्र जी ने मन मे अनुमान कर कि जिस हेतु भगवान का अवतार हुआ है उसका अब समय आ गया है। क्योंकि भगवान ने सन्तों हेतु विप्रो, गौ हेतु ही इस धराधाम में अवतार लिया। राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को यज्ञ रक्षणार्थ अपने साथ ले चले। मार्ग पर चलते हुए अनेकों राक्षसों का संहार कर सन्तों को भय मुक्त किया। गुरु की सन्निधि में रह अनेकों विद्याओं में पारंगत हुए संस्कार सम्पन्नता से ही जीवन सफल होता है। आगे मार्ग में चलते हुए पाषाण शिला को देख कर श्री राम जी ने गुरुदेव से पूछा कि यह पाषाण शिला में कौन है गुरुदेव ने बताया कि गौतम नारी अहिल्या जिन्हें स्वयं गौतम ऋषि के श्राप से पाषाण शिला हो गई। यह आपके चरण रज चाहती है जिससे यह श्राप से मुक्त हो जाएगी। भगवान ने विप्र और क्षत्रिय की तुलना बताई क्या हम विप्रो को अपने चरण स्पर्श कराऐ गुरुदेव के कथनानुसार भगवान ने   पाषाणअहिल्या को चरणों से स्पर्श कराया तुरंत ही सुन्दर नारी के रूप में प्रकट हो गई हांथ जोड़ भगवान के सामने खड़ी हो गई व श्री राम जी से मैं नारी अपावन और आप जग पावन हैं। मैं तो सौभाग्य मानती हूं कि मेरे पति ने श्राप दे मेरे ऊपर बड़ा ही अनुग्रह किया है भगवान को बार-बार प्रणाम कर आनन्द पूर्वक पति लोक को विदा हुई। भगवान के प्रति विश्वास ही आज अहिल्या का उद्धार कर सका अत: भगवान से नित्य सानिध्य बनाए रखना चाहिए।आरती में मुख्य यजमान यशवीर शर्मा, महेश अग्रवाल, अम्बरीष गुप्ता, देवेन्द्र तिवारी, श्रीहरि, ओम मिश्रा, आनन्द मोहन अग्रवाल, संजय शर्मा, सन्तोष अग्रवाल, रामप्रसाद शाक्य, बद्री प्रसाद गुप्ता व समस्त साधकों पदाधिकारियों के साथ गणमान्य भक्त श्रद्धालुओं ने भव्य आरती सम्पन्न की।