धर्मात्मा वह है जो मानवता से प्यार करता हो, मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं-मुनिश्री

Feb 19 2021

ग्वालियर। धर्मात्मा वह हैं जो मानवता से प्यार करता हो मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं हो सकता है। जो व्यक्ति इंसान की गोद में जन्म लेकर इंसान से प्यार नहीं कर सका वह भगवान से भी प्यार नहीं कर सकता है। भगवान से वही प्यार कर सकता है जो चींटी के अंदर भी भगवान देखने की नजर रखता हो। सेवा वह धर्म है जिससे सभी के दिलों में स्थान बनाया जा सकता है सेवा से ही हनुमान ने राम के हृदय में स्थान बनाया था। जिस कारण राम को कहना पड़ा कि हनुमान तो मेरा भरत के समान प्रिय भाई है। यह विचार राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने शुक्रवार को नई सड़क स्थित चंपाबाग धर्मशाल में संबोधित करते हुए कही। इस मौके पर पंचकल्याक के महामंत्री पवन जैन, संयोजक विनय कासलीवाल, जैन मिलन के अध्यक्ष संजीव अजमेरा, सचिव योगेश जैन, पंकज बाकलीवाल, आदि मौजूद थे।
मुनिश्री के सानिध्य में पारसनाथ ट्रस्ट मंदिर का भूमि पूजन आज
राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज एवं मुनिश्री विजेयश सागर महाराज के सानिध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य अजित कुमार शास्त्री के मार्गदर्शन में 20 फरवरी शनिवार को प्रात: 9.00 बजे से दाना ओली स्थित श्री दिगंबर पारसनाथ ट्रस्ट भवन का जीर्णोद्धार नवनिर्माण के लिए भूमि पूजन कार्यक्रम एवं प्रवचन आयोजित होंगे।
धर्म जिनालय मंदिर एवं मुनिसुव्रतनाथ जैन मंदिर की प्रतिमाएं आई
अयोध्या नगरी फूलबाग में राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज एवं विजयेश सागर महाराज के सान्निध्य में 22 से 27 फरवरी तक श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक जिन बिम्ब प्रतिष्ठा महामहोत्सव हेतु अनुपम प्रतिमाएं जयपुर एवं मकराना से तैयार होकर आईं।
पंचकल्याक महोत्सव के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनिश्री के सानिध्य में तानसेन नगर स्थित दिगबर धर्मनाथ जैन मंदिर एवं दिगंबर जैन मुनिसुव्रतनाथ मंदिर शिंदे की छावनी के पंचकल्याकण  प्रतिष्ठा आयोजित होंगे।
तानसेन नगर दिगंबर धर्मनाथ जिनालय मंदिर की जयपुर से आई मूलनायक 1008  धर्मनाथ भगवान अष्टधतु की 2 फुट की 2 सौ वजन अष्टधातु की  विशाल पद्मासन प्रतिमा, एवं शांतिनाथ, महावीर, नेमिनाथ, आदिनाथ, पार्श्वनाथ व मुनिसुव्रतनाथ की 7 से 9 इंच की पद्मासन प्रतिमा आई है।
 शिंदे की छावनी स्थित दिगंबर जैन मुनिसुव्रतनाथ मंदिर डोंगरपुर में विराजित मकराना से आई मूलनायक 1008 भगवान मुनिसुव्रतनाथ की काले रंग, वजन 550 किलो, 350 फुट एवं 12 पाषण प्रतिमाएं 9 इंच एवं 3 प्रतिमाएं अष्टधातु की आई है।